

Shesh Katha

Shesh Katha
₹290.00 ₹220.00
₹290.00 ₹220.00
Author: Mamta Kaliya
Pages: 192
Year: 2026
Binding: Paperback
ISBN: 9789362010391
Language: Hindi
Publisher: Setu Prakashan
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Description
शेषकथा
कथाकार, कथेतर गद्य की रचनाकार के रूप में शीर्ष पहचान अर्जित करने वाली ममता कालिया ने विगत वर्षों में पाठक वर्ग को स्मृत्यात्मक सर्जनात्मकता से अभिभूत किया है और चकित भी। चकित होने की अनेक वजहें हो सकती हैं-अप्रत्याशा, उत्कृष्टता, औचकपन आदि परन्तु इनके प्रभाव की कालावधि छोटी रहती है। पाठक या सामाजिक का अभिभूत होना भी उन्हीं तत्त्वों से घटित होता है, जिनसे वह चकित होता है। किन्तु इसके असर की कालावधि दीर्घजीवी होती है। कहना होगा, ममता कालिया के गद्य का अधिकांश अभिभूत करने की शक्ति से समृद्ध है। ममता कालिया के रचनाकार ने जिन विशेषताओं को हासिल किया है- सहजता, प्रवाहमयता, दृश्यात्मकता, नवाचार और स्त्री चेतना का व्यावहारिक पक्ष आदि उन्हें स्मृत्यात्मक सर्जनात्मकता में पिरोते हुए उन्होंने गद्य की अनेक अद्भुत और यादगार कृतियाँ रची हैं। ऐसी ही शानदार उपलब्धि है- ‘शेषकथा’। ‘शेषकथा’ उनकी स्मृत्यात्मक रचनायात्रा का नूतन पड़ाव है। ‘शेषकथा’ को कोई चाहे तो उपन्यास की तरह पढ़ सकता है, कोई चाहे तो संस्मरण या आत्मकथा की तरह। यहाँ इंसानों के संग स्थान, समय, जीवन इस तरह विन्यस्त हो सके हैं कि यह उपस्थित समयों का चाक्षुष डॉक्यूमेण्टेशन प्रतीत होने लगता है। सम्भवतः इन विशेषताओं के कारण भी ‘शेषकथा’ सर्जनात्मक गद्य की अनुपम किताब है। ‘शेषकथा’ के संसार में इलाहाबाद है, तो व्यासपिण्ड (जालन्धर जिला), मुम्बई भी है। इसमें रवीन्द्र कालिया हैं तो धर्मवीर भारती, कमलेश्वर, राजेन्द्र यादव आदि भी हैं। इन सबके समानान्तर और साथ साथ हैं, हिन्दी की समादृत और अनूठी रचनाकार ममता कालिया का बचपन, युवावस्था, रिश्ते-नाते, मायका, ननिहाल, ससुराल, विद्यार्थी जीवन, नौकरी की जद्दोजहद, प्यार, विवाह, दाम्पत्य, घर-परिवार, बच्चे, बेढब दिनचर्या। स्मृतियों की विशेषता होती है कि वे पुनसृजित होती हैं। ममता कालिया की ‘शेषकथा’ में पुनसृजन का यह जादू उसमें मौजूद शख्सियतों, स्थानों, दास्तानों को पुनर्नवा कर देता है। संक्षेप में कहें, ‘शेषकथा’ न केवल ममता कालिया के लेखन का महत्त्वपूर्ण सोपान है बल्कि वह हिन्दी साहित्य का भी विशिष्ट अर्जन है।
– अखिलेश
वरिष्ठ साहित्यकार एवं ‘तद्भव’ पत्रिका के सम्पादक
Additional information
| Authors | |
|---|---|
| Binding | Paperback |
| ISBN | |
| Language | Hindi |
| Pages | |
| Publishing Year | 2026 |
| Pulisher |









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