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सिंगुर और नन्दीग्राम से निकले सवाल
सिंगुर और नन्दीग्राम से जितने सवाल निकले हैं, उनका समाधान पूँजीवादी और साम्यवादी, दोनों दायरों में सम्भव नहीं दिखता। हो भी नहीं सकता, क्योंकि ये दोनों घटनाएँ पूँजीवादी और साम्यवादी नीतियों के अवैध सम्बन्धों के चलते ही उत्पन्न हुई हैं। उदारीकरण की प्रक्रिया के कारण बने इन सम्बन्धों ने लोभ और क्रूरता के ऊँचे प्रतिमान कायम किये हैं। इन दोनों घटनाओं से संवेदनशील व्यक्ति तो हैरान हैं ही, वे कम्युनिस्ट भी कम परेशान नहीं हैं, जो मानते थे कि कम्युनिस्ट पार्टी का काम तो मजदूरों और किसानों की तरफ से पूँजीपतियों से लड़ना होता है।
Additional information
| Authors | |
|---|---|
| Binding | Hardbound |
| ISBN | |
| Language | Hindi |
| Pages | |
| Publishing Year | 2018 |
| Pulisher |











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