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Description
तेरा पत्र मिला
“खुशबू जैसे लोग मिले अफसाने में,
एक पुराना खत खोला अनजाने में।”
पत्रों की विधा, जो आज भी किसी न किसी रूप में बेशक़ीमती है, समाप्तप्रायः होती जा रही है। अब पत्रों में लिखी इबारतें कागज़ों से उठ कर मशीनी दौर, ‘आई-पैड’, ‘ई-पैड’ या ‘व्हाट्स-अप’ की तकनीकी भाषा में बदलती जा रही हैं। पत्रों में बंद खुशबू, रोमांचकारी सरसराहट, रुमानियत अब विलुप्त होती जा रही है। अब पत्र केवल सूचना पत्र हो गये हैं, कठोर, सांसारिक—जिनमें भावनाओं की कोमलता समाप्त हो गई है। तो मुझे लगा कि पत्रों की इस विधा को विदा देने से पहले या दफ़नाने से पहले, एक बार इन्हें कागज़ पर उतार दूँ। कुछ असलियतें, वास्तविकताएँ, अफसाने के रूप में इन पत्रों के माध्यम से एक कहानी बुनते हैं। मेरे पत्र उतने महान नहीं हैं, ये केवल अन्तःवृत्तियाँ हैं। आज के समय की कुछ इमेजेस या सच्चाइयाँ।
– कुसुम अंसल
Additional information
| Authors | |
|---|---|
| Binding | Hardbound |
| ISBN | |
| Language | Hindi |
| Pages | |
| Publishing Year | 2024 |
| Pulisher |











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