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Udarikaran Ki Tanashahi
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Author: Prem Singh
Pages: 150
Year: 2008
Binding: Hardbound
ISBN: 9788126712533
Language: Hindi
Publisher: Rajkamal Prakashan
उदारीकरण की तानाशाही
यह पुस्तक उदारीकरण-भूमंडलीकरण की परिघटना पर केन्द्रित है। इसमें उदारीकरण के नाम से प्रचारित नई आर्थिक नीतियों के देश की अर्थव्यवस्था और राजनीति पर पड़नेवाले प्रभावों का विश्लेषण किया गया है। पुस्तक की मुख्य स्थापना है : वैश्विक आर्थिक संस्थाओं—विश्व बैंक, अन्तरराष्ट्रीय मुद्राकोष, विश्व व्यापार संगठन—और बहुराष्ट्रीय कम्पनियों के ‘डिक्टेट’ पर लादी जा रही आर्थिक ग़ुलामी का नतीजा राजनैतिक ग़ुलामी में निकलने लगा है।
इसके साथ यह भी दर्शाया गया है कि आर्थिक और राजनैतिक के साथ सांस्कृतिक और शैक्षिक क्षेत्रों पर भी उदारीकरण की तानाशाही चल रही है। इसके लिए अकेले राजनैतिक नेतृत्व को ज़िम्मेदार न मानकर, भूमंडलीकरण के समर्थक बुद्धिजीवियों और विदेशी धन लेकर एनजीओ चलानेवाले लोगों को भी ज़िम्मेदार माना गया है।
स्तक में भूमंडलीकरण को नवसाम्राज्यवाद का अग्रदूत मानते हुए साम्राज्यवादी सभ्यता के बरक्स वैकल्पिक सभ्यता के निर्माण की ज़रूरत पर बल दिया गया है।
पुस्तक में सारी बहस देश और दुनिया की वंचित आबादी की ज़मीन से की गई है। इस रूप में यह सरोकारधर्मी और हस्तक्षेपकारी लेखन का सशक्त उदाहरण है।
भाषा की स्पष्टता और शैली की रोचकता पुस्तक को सामान्य पाठकों के लिए पठनीय बनाती है।
| Authors | |
|---|---|
| Binding | Hardbound |
| ISBN | |
| Pages | |
| Publishing Year | 2008 |
| Pulisher | |
| Language | Hindi |
प्रेम सिंह
डॉ. प्रेम सिंह दिल्ली विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग में रीडर हैं। भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान, शिमला में बतौर फैलो तीन वर्ष (1991-94) हिन्दी और बंगला उपन्यास में क्रांति के विचार का अध्ययन किया है। अध्ययन का एक भाग क्रान्ति का विचार और हिंदी उपन्यास शीर्षक से प्रकाशित है। इस पुस्तक पर हिंदी अकादमी दिल्ली का वर्ष 2000-2001 का साहित्यिक कृति सम्मान मिला है। अन्य प्रकाशित पुस्तके हैं – अज्ञेय : चिंतन और साहित्य, निर्मल वर्मा : सृजन और चिंतन (संपा.), मधु लिमये : जीवन और राजनीति (संपा.), कट्टरता जीतेगी या उदारता, रंग प्रक्रिया के विविध आयाम (संपा.)। दो कविता-संग्रह अभिशप्त जियो और पीली धूप पीले फूल एवं एक कहानी-संग्रह काँपते दस्तावेज भी प्रकाशित हैं।

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