Description
वह लंबी खामोशी
…मैं मोहन के लिए बनी बनाई तैयार थी—जैसे कि हमारी शादी के शीघ्र ही बाद मोहन ने मुझे बताया था—वह ऐसी लड़की से शादी करना चाहता था जो अच्छी अंग्रेजी बोल सके। उसके इस कथन से मुझे आश्चर्य हुआ था और दादा के उन शब्दों से भी जब उन्होंने पहली बार मोहन के विषय में मुझसे कहा था। दादा ने कहा था, “मेरा पक्का अनुमान है कि वह एक शिक्षित सुसंस्कृत पत्नी चाहता है। उसका कहना है कि उसे दान-दहेज, रुपये-पैसे आदि से कुछ मतलब नहीं है।”
एक शिक्षित पत्नी…मुझे संदेह हुआ कि क्या सब पुरुष इसी तरह के परिशुद्ध, निश्चित, सूक्ष्म विचार रखते हैं। लड़कियों के लिए या कम-से-कम मेरे और उन बहुत-सी मेरी जानी-पहचानी लड़कियों के लिए यह खोज अस्पष्ट और धुंधली रही थी। हम भी किसी खोज में थे, पर किस चीज़ की खोज में थे, यह नहीं जानते थे। या अगर जानते भी थे तो उसे कोई विशेष नाम देने की इच्छा नहीं थी। यदि हमें नाम देने को विवश ही किया जाता, कि हम किस वस्तु की खोज में हैं, तो मेरा अनुमान है कि हम उसे ‘प्रेम’ का नाम देते, जैसा चलचित्रों में नरगिस और राज कपूर के बीच, कैरी ग्रांट और डेबोरा कर के बीच होते देखा था। उसका अर्थ था, एक सुंदर युवा पुरुष यह कहता हुआ, ‘मैं तुमसे प्रेम करता हूँ’—ऐसा सुंदर युवा जो उन असली युवाओं से नितांत भिन्न था जिन्हें हम प्रतिदिन देखते थे।
हमने प्रेम का यह वस्त्र उन सब युवा व्यक्तियों को पहनाकर देखा, जो हमारे संपर्क में आए, हर बार यह जानने को उत्सुक थे कि क्या यह ठीक बैठेगा ?
(इसी उपन्यास से एक अंश)
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