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Description
पाँच नुक्कड़ नाटक
नुक्कड़ नाटकों की जरूरत पैदा होने के पीछे कई कारण रहे हैं। सबसे पहला और तात्कालिक कारण था—देश में शोषक वर्गों के दमन का तेज होना। सामाजिक-राजनीतिक क्षेत्र में भी और सांस्कृतिक क्षेत्र में भी। आजादी के बाद अंग्रेजी शासन का अंत होने से देश आजाद नहीं हुआ। देश की जनता अब भी सामंतों और पूँजीपतियों के शासन-तले पिस रही है। इस सच्चाई के सामने आते ही जनता के आंदोलन में तेजी आई। दूसरी ओर शोषक वर्गों ने इन आंदोलनों को कुचलने या भटकाने के लिए कदम उठाने शुरू किए।
इस दमन का विरोध करने का सबसे सशक्त माध्यम बन गए हैं नुक्कड़ नाटक, जो बरबस दर्शकों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं। इस पुस्तक में इन सब बुराइयों-असमानताओं के प्रति जागरूकता लाने और आम जन को सचेत करनेवाले पाँच नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत किए गए हैं।समाज की सुप्त चेतना पर प्रहार कर उसे सचेत करने का सफल प्रयास हैं ये नुक्कड़ नाटक।
Additional information
| Authors | |
|---|---|
| Binding | Hardbound |
| ISBN | |
| Language | Hindi |
| Pages | |
| Publishing Year | 2018 |
| Pulisher |











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