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Description
मेरे हिस्से की चाँदनी
‘मेरे हिस्से की चाँदनी’ डॉ. सुमन जैन के मुक्तकों, गीतों और ग़ज़लों का संग्रह है। कवि कर्म के उत्तरदायित्वों को इन्होंने अच्छी तरह निभाया है, जबकि निरंकुश होने के अधिकार का दुरुपयोग करने की प्रवृत्ति आजकल कवियों में जोरों पर है। युगीन प्रभाव के कारण आज की कविता में जो विविधता आ गई है, उसका अतिरेक ऐसी कविताओं में दिखाई देता है, जिन्हें कविता कहने का कोई आधार नहीं मिलता। ऐसी स्थिति में साफ-सुथरी, रसपूर्ण और प्रौढ़ कविताओं का यह संग्रह लेखिका की परम उपलब्धि के साथ-साथ पाठकों और श्रोताओं के लिए सुखद अनुभव भी है।
सुमन जी की कविताओं में नारी जीवन की विड़म्बनाओं की मार्मिक अभिव्यक्ति हुई है। यह अभिव्यक्ति एक नारी रचनाकार का पूर्वाग्रह न होकर मर्मस्पर्शी चित्रण बन गया है।
सहृदयों के लिए आज भी ‘रसात्मक वाक्य’ ही काव्य है। आज की वे सारी कविताएँ जो घृणा, विद्वेष, दुराग्रह से पोषित हैं, निन्दारस पर आधारित हैं। प्रगति के भीतर भी कुछ न कुछ पारम्परिक रहता ही है। परिवर्तन की भी परम्पराएँ होती हैं। भाषा के मँजाव के लिए और मुहावरों को चलन में ढलने के लिए भी एक अवधि चाहिए, इसलिए कवि का धर्म हो जाता है कि वह अपने पूर्ववर्ती काव्य की उपलब्धियों का आदर करें।
‘मेरे हिस्से की चाँदनी’ जैसे शीर्षक बहुत कुछ कह जाते हैं… विश्व में सबकी अपनी उपलब्धियाँ और सीमाएँ होती हैं… अपने निजी दुःख-सुख होते हैं… और उनकी अभिव्यक्ति होती है, जो अपनी जगह अद्वितीय होती है… उनकी निजता ही उनका सौभाग्य है। यह बूँद को सागर में खो जाने से बचाए रखती है-‘मेरे हिस्से की चाँदनी’ इसी लघु अस्तित्व के स्वातंत्र्य की घोषणा है…
Additional information
| Authors | |
|---|---|
| Binding | Hardbound |
| ISBN | |
| Language | Hindi |
| Pages | |
| Publishing Year | 2002 |
| Pulisher |











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