Kahte Hain Tab Shanshaah So Rahe The

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Kahte Hain Tab Shanshaah So Rahe The

Kahte Hain Tab Shanshaah So Rahe The

120.00 95.00

In stock

120.00 95.00

Author: Uma Shankar Choudhary

Availability: 5 in stock

Pages: 136

Year: 2011

Binding: Hardbound

ISBN: 9788126316946

Language: Hindi

Publisher: Bhartiya Jnanpith

Description

कहते हैं तब शहंशाह सो रहे थे

उमा शंकर की कविताएँ अपने मूल स्वर में राजनीतिक हैं और इनके विषय वस्तु का क्षेत्र व्यापक है। यथार्थवादी विचार व भाव की इन कविताओं में स्वाभाविक रूप से एक बेचैनी है।

– नामवर सिंह (‘अंकुर मिश्र स्मृति पुरस्कार 2007’ के निर्णायक के रूप में दी गयी सम्मति)

उमा शंकर चौधरी युवा कवियों में एक जाना-माना नाम है— रघुवीर सहाय की परम्परा का उत्तर आधुनिक विस्तार ! भूमण्डलीकरण के बाद के क़स्बे, नगर, गली, मुहल्ले उनकी कविता में अकबकाये मिलते हैं— जन जीवन में बिखरी पीड़ा, विवशता और बेचैनी के कई अन्तरंग चित्र इनकी कविता खड़े करती है। राजनीतिक षड्यन्त्र, आगजनी, हत्या, आतंक, लूटपाट और मूल्यहीनता, आपसी सम्बन्धों में सहज ऊष्मा का अभाव, अपने आप में इतने बड़े विषय हैं कि ‘कोई कवि बन जाये सहज सम्भाव्य है’। लेकिन इन बड़े विषयों पर लिखते हुए बड़बोला होने के ख़तरे बने रहते हैं। उमा शंकर की ख़ासियत यह है कि वे बड़बोला होने से बचते हैं— कभी फ़ैंटेसी के सहारे, कभी दूसरी महीन तकनीकों के दम से जो अचानक ब्रेक लगाकर पाठक को झटक देती हैं; आँखों को और अधिक आँखें बनाती हैं, कानों को और अधिक कान, कम-से-कम चौकन्ना तो उसको कर ही देती हैं जो अपने आप में एक बड़ी बात है।

– अनामिका (‘जनसत्ता’ के स्तम्भ ‘रंग-राग’ से)

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Authors

Binding

Hardbound

ISBN

Language

Hindi

Pages

Publishing Year

2011

Pulisher

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