Dr. Vishambhar Nath Upadhyay
डॉ. विश्वम्भरनाथ उपाध्याय
जन्म : 7 जनवरी, 1925
शिक्षा : एम.ए. हिन्दी, 1953, एम.ए. संस्कृत, 1955, पीएच.डी. – हिन्दी ‘सन्त वैष्णव काव्य पर तान्त्रिक प्रभाव’, 1959, डी.लिट्. ‘भारतीय काव्यशास्त्र’ 1970, आलाक़ाब्लियत, उर्दू, साहित्य रत्न —प्रथम श्रेणी।
अध्यापन अनुभव :
प्रवक्ता : हिन्दी विभाग, 1953 से 1960 तक आगरा कॉलेज, आगरा।
प्रवक्ता : डी. एस.बी., राजकीय महाविद्यालय, नैनीताल, 1960 से 1965 तक।
रीडर : हिन्दी विभाग, राजस्थान विश्वविद्यालय, जयपुर, 1965 से 1980 तक।
प्रोफेसर तथा अध्यक्ष : हिन्दी विभाग, राजस्थान विश्वविद्यालय, जयपुर-1980-85।
मानद निदेशक : प्रेमचन्द एवं सुब्रह्मण्य भारती पीठ, राजस्थान विश्वविद्यालय, जयपुर। प्राचार्य, विश्वविद्यालय संघटक महाविद्यालय, राजस्थान कॉलेज, जयपुर, 1978-80। कुलपति, कानपुर विश्वविद्यालय, कानपुर, 1991-94।
वाणी से प्रकाशित पुस्तकें :
आलोचना : भारतीय काव्यशास्त्र, परिप्रेक्ष्य को सही करते हुए।
उपन्यास : रीछ, विश्वबाहु परशुराम, सिद्ध सरहपा, विद्याधर बैताल आख्यान।
कविता : गंगा, गुनगुनाते हुए।
पुरस्कृत रचनाएँ :
विश्वबाहु परशुराम-बिड़ला फाउंडेशन तथा महाराष्ट्र राज्य अकादमी, मुम्बई भारत-भारती सम्मान, हिन्दी संस्थान, उत्तर प्रदेश।