Jagdish Chandra Mathur

Jagdish Chandra Mathur

जगदीशचन्द्र माथुर

जन्म : 16 जुलाई, 1917; शाहजहाँपुर (उ.प्र.)।

शिक्षा: एम.ए. (अंग्रेज़ी) इलाहाबाद विश्वविद्यालय। सन् 1941 में आई.सी.एस. परीक्षा उत्तीर्ण। अमेरिका में विशेष प्रशिक्षण प्राप्त किया।

प्रमुख कृतियाँ : सन् 1936 में प्रथम एकांकी ‘मेरी बाँसुरी’ का मंचन व ‘सरस्वती’ में प्रकाशन। पाँच एकांकी नाटकों का संग्रह ‘भोर का तारा’ सन् 1946 में प्रकाशित। इसके बाद ‘ओ मेरे अपने’ (1950), ‘मेरे श्रेष्ठ रंग एकांकी’, ‘कोणार्क’ (1951), ‘बंदी’ (1954), ‘शारदीया’ (1959), ‘पहला राजा’ (1969), ‘दशरथ नन्दन’ (1974) तथा ‘कुँवरसिंह की टेक’ (1954) और ‘गगन सवारी’ (1958) के अलावा दो कठपुतली नाटक भी लिखे। ‘दस तस्वीरें’ और ‘जिन्होंने जीना जाना’ में रेखाचित्र संस्मरण हैं। ‘परम्पराशील नाट्य’ उनकी समीक्षा दृष्टि का परिचायक है। ‘बहुजन-सम्प्रेषण के माध्यम’ जगदीश जी की ‘जन-संचार’ पर विशिष्ट पुस्तक मानी गई है।

सन् 1944 में बिहार के सुप्रसिद्ध सांस्कृतिक पर्व वैशाली महोत्सव का बीजारोपण किया।

सम्मान : ‘विद्यावारिधि’ की उपाधि से विभूषित, ‘कालिदास अवार्ड’ और ‘बिहार राजभाषा पुरस्कार’ से सम्मानित।

कार्य : ऑल इंडिया रेडियो में महानिदेशक रहे, फिर सूचना और प्रसारण मंत्रालय में संयुक्त सचिव। गृह मंत्रालय में हिन्दी सलाहकार के पद पर भी कार्य किया। हार्वर्ड विश्वविद्यालय के विज़़िटिंग फ़ेलो के अतिरिक्त अन्य अनेक महत्त्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स से जुड़े थे।

निधन : 14 मई, 1978; दिल्ली में।

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