Kamal Nayan Chaubey
कमल नयन चौबे
कमल नयन चौबे दिल्ली विश्वविद्यालय के दयाल सिंह कॉलेज के राजनीति विज्ञान विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर हैं। इनकी कुछ प्रकाशित कृतियाँ हैं: जंगल की हकदारी :
राजनीति और संघर्ष (2015); जातियों का राजनीतिकरण : बिहार में पिछड़ी जातियों के उभार की दास्तान (2008)। इन्होंने मिथिलेश कुमार झा के साथ मिलकर इण्डियन पॉलिटिक्स एण्ड पॉलिटिकल प्रॉसेसेज : आइडियाज, इंस्टीट्यूशंस एण्ड प्रैक्टिसेज (2024), ज्याँ ट्रेज के साथ भारतीय नीतियों का सामाजिक पक्ष (2017), सुरिन्दर एस. जोधका के साथ भारतीय ग्रामीण श्रृंखला के तीन खण्डों (2019) का सम्पादन किया है। इन्होंने दलित ज्ञान मीमांसा (दो खण्ड) (2022) का सम्पादन किया है। इन्होंने जॉन रॉल्स की पुस्तक अ थियरी ऑफ जस्टिस (2022) और विल किमलिका की पुस्तक कण्टेम्पररी पॉलिटिकल फिलॉसफी (2009) जैसी कई महत्त्वपूर्ण पुस्तकों का हिन्दी अनुवाद किया है। इनके शोध-आलेख, इकोनॉमिक एण्ड पॉलिटिकल वीकली, सोशल चेंज, स्टडीज इन इण्डियन पॉलिटिक्स, इण्डियन जर्नल ऑफ पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन, आलोचना, प्रतिमान, सबलोग जैसे जर्नल और पत्रिकाओं में प्रकाशित होते रहे हैं। चौबे समाज विज्ञान की प्रतिष्ठित पत्रिका प्रतिमान की सम्पादकीय टीम से भी जुड़े रहे हैं। हाल ही में इनकी पुस्तक आदिवासी ऑर वनवासी : ट्राइबल इण्डिया एण्ड द पॉलिटिक्स ऑफ हिन्दुत्व (2025) प्रकाशित हुई है।

