Manish Kumar Singh

Manish Kumar Singh

मनीष कुमार सिंह

पहली कहानी 1987 में ‘नैतिकता का पुजारी’ लिखी। क़रीब डेढ़ सौ कहानियाँ, दो दर्जन लघुकथाएँ और दो उपन्यास लिखे हैं।

रचनाओं का प्रकाशन

विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं यथा- ‘हंस’, ‘नया ज्ञानोदय’, ‘कथादेश’, ‘कथाक्रम’, ‘समकालीन भारतीय साहित्य’, ‘पाखी’, ‘भाषा’, ‘पुस्तक वार्ता’, ‘दैनिक भास्कर’, ‘नयी दुनिया’, ‘नवनीत’, ‘शुभ तारिका’, ‘अक्षरपर्व’, ‘अक्षरा’, ‘लमही’, ‘परिकथा’, ‘शब्दयोग’, ‘साक्षात्कार’ इत्यादि में कहानियाँ और लघुकथाएँ प्रकाशित। राजभाषा हिन्दी पर लिखे निबन्ध ‘राजभाषा भारती’ और ‘गवेषणा’ पत्रिकाओं में प्रकाशित।

प्रकाशित पुस्तकें : कहानी-संग्रह : ‘आख़िरकार’ (2009), ‘धर्मसंकट’ (2009), ‘अतीतजीवी’ (2011), ‘वामन अवतार’ (2013), ‘आत्मविश्वास’ (2014), ‘साँझी छत’ (2017), और ‘विषयान्तर’ (2017); उपन्यास : ‘आँगन वाला घर’ (2017) और ‘मध्यान्तर’ (2022)।

पुरस्कार : जयपुर साहित्य संगीति के द्वारा 2021-22 के लिए उपन्यास विधा में मध्यान्तर को पुरस्कृत किया गया। 26 जून, 2021 को भारत सरकार, संस्कृति मन्त्रालय के तत्वाधान में आयोजित पहली बार ‘लेखक से मिलिए’ कार्यक्रम में आमन्त्रित किया गया। जहाँ बतौर लेखक अपनी रचनाओं और साहित्य यात्रा का वर्णन किया। कथादेश लघुकथा प्रतियोगिता, 2015 में मेरी लघुकथा शरीफ़ों का मुहल्ला पुरस्कृत। ई-कल्पना पत्रिका के द्वारा आयोजित जुलाई 2019 कहानी प्रतियोगिता में मेरी कहानी सोयी हुई गली और जनवरी 2020 में अँधेरे की परछाइयाँ प्रथम पुरस्कार से सम्मानित।

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