Max Muller

Max Muller

मैक्स मूलर

फ्ऱेडरिक मैक्स मूलर का जन्म जर्मनी के डेसाउ नगर में 1823 ईस्वी में हुआ था। उन्होंने 18 वर्ष की आयु में लीपजिग विश्वविद्यालय में संस्कृत का अध्ययन शुरू कर दिया और 1843 में बीस वर्ष की आयु में स्नातक परीक्षा उत्तीर्ण करने के एक साल बाद ही ‘हितोपदेश’ का जर्मन भाषा में अनुवाद प्रकाशित करा दिया। इसके बाद तो संस्कृत के प्राचीन ग्रंथों के अनुवादों का सिलसिला शुरू हो गया। ‘कठोपनिषद्’ और ‘केनोपनिषद्’ का जर्मन भाषा में अनुवाद करने के बाद उन्होंने ‘मेघदूत’ का जर्मन भाषा में पद्यानुवाद किया।

1846 में मैक्स मूलर लन्दन के इंडिया हाउस में सुरक्षित प्राचीन पांडुलिपियों से अपनी पांडुलिपियों का मिलान करने के लिए आए। वहाँ उन्होंने ईस्ट इंडिया कम्पनी के व्यय पर 1846 में ही ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में सायण भाष्य सहित ‘ऋग्वेद’ का सम्पादन करना प्रारम्भ कर दिया। ‘ऋग्वेद’ के प्रकाशन में उन्हें 27 साल लगे। 1873 में छह खंडों में प्रकाशित उनके ‘ऋग्वेद’ की सभी प्रतियाँ बिक गईं। 1892 में उन्होंने सायण भाष्य सहित ‘ऋग्वेद’ का, लगभग एक-एक हजार पृष्ठों के चार खंडों में संशोधित, दूसरा संस्करण प्रकाशित कराया।

1896 के जून महीने में प्रो. मैक्स मूलर के आमंत्रण पर स्वामी विवेकानन्द उनसे मिलने लन्दन से ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय स्थित उनके आवास पर गए थे। उस समय प्रो. मैक्स मूलर की आयु 73 वर्ष की थी। 28 अक्टूबर, सन् 1900 को इस मनीषी का देहान्त इंग्लैंड के ऑक्सफोर्ड में हुआ।

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