Noon Meem Rashid
नून मीम राशिद
उर्दू साहित्य में आधुनिकतावाद के प्रणेताओं में से एक नून मीम राशिद का पूरा नाम नज़र मुहम्मद राशिद था। उनका जन्म पंजाब के गुजराँवाला ज़िले के कोटबग्गा गाँव में 1 अगस्त, 1910 को हुआ था। लाहौर के गवर्नमेंट कॉलेज में अर्थशास्त्र में स्नातकोत्तर के बाद उन्होंने द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान रॉयल इंडियन आर्मी में अपनी सेवाएँ दीं। विभाजन से पहले नई दिल्ली और लखनऊ में ऑल इंडिया रेडियो में रहे। 1947 में उनका स्थानांतरण पेशावर हो गया जहाँ उन्होंने 1953 तक काम किया। बाद में वॉयस ऑफ़ अमेरिका में काम के लिए न्यूयॉर्क गए। कुछ समय ईरान में भी रहे। इसके बाद यूनाइटेड नेशंस से जुड़े और इस दौरान कई मुल्कों में काम किया।
उनकी प्रकाशित पुस्तकें हैं—‘ईरान में अजनबी’, ‘ला-इंसान’, ‘गुमान का मुमकिन’ और उनके निबन्धों का संग्रह ‘मक़ालात’ जिसे शिमा मजीद ने सम्पादित किया है।
उनकी सुप्रसिद्ध नज़्म ‘ज़िन्दगी से डरते हो’ फ़िल्म ‘पीपली लाइव’ में एक गीत के रूप में भी चर्चित हुई थी जिसे ‘इंडियन ओशन’ समूह ने गाया था।
9 अक्तूबर, 1975 को उनका निधन हो गया।