Prakashvati Pal

Prakashvati Pal

प्रकाशवती पाल

प्रसिद्ध क्रान्तिकारी और लेखक यशपाल की क्रान्तिकारी पत्नी। जन्म 31 जनवरी, 1914 को लाहौर के खत्री परिवार में।

प्रकाशवती पाल की गणना उन क्रान्तिकारियों में होती है जिन्होंने देश को स्वाधीन कराने में अपने जीवन के हर पल को अर्पण किया। जिनका क्रान्तिकारी गतिविधियों से परिचय विद्यार्थी जीवन से ही हो गया था।

लाहौर में विदेशी कपड़ों की होली में अपने गोटे-किनारी लगे कपड़े जला दिए और लाहौर कांग्रेस में वालंटियर बनकर आज़ादी की लडाई में भाग लिया।

फिर व्यग्र हो उसी दौरान परिवार को छोड़ ब्रिटिश सरकार को चोट देने के लिए क्रान्तिकारी दल में शामिल हो गईं। लगातार आर्थिक सहायता भी दी। यशपाल और चन्द्रशेखर आज़ाद से सफल निशाना लगाने की शिक्षा पाई।

देहली कांस्परेसी केस में वह मुख्य अभियुक्त थीं। ब्रिटिश सरकार का इनाम उनके सिर पर था। सन् 1934 में प्रकाशवती दरियागंज, दिल्ली में गिरफ़्तार हो गईं।

सन् 1936 में बोली जेल में यशपाल से एक रुपया चार आना में विवाह कर, पढ़ाई में व्यस्त हो दाँतों की सर्जन बन गईं।

मार्च 1938 में यशपाल के रिहा होने पर ‘विप्लव’ पत्रिका के प्रकाशन में सहयोग दे सफल बनाया। यशपाल को आर्थिक चिन्ताओँ से मुक्त कर प्रकाशन का काम सँभाल लिया। जीवन-भर यशपाल के साथ सुखी दाम्पत्य जीवन जीकर उन्होंने साहित्य-सृजन में बहुमूल्य योगदान किया।

wiltoto wiltoto wiltoto wiltoto wiltoto wiltoto wiltoto wiltoto wiltoto wiltoto wiltoto wiltoto wiltoto wiltoto wiltoto wiltoto wiltoto wiltoto wiltoto wiltoto wiltoto wiltoto wiltoto wiltoto wiltoto wiltoto wiltoto wiltoto wiltoto wiltoto wiltoto wiltoto wiltoto wiltoto wiltoto wiltoto wiltoto wiltoto wiltoto wiltoto wiltoto wiltoto wiltoto wiltoto wiltoto wiltoto wiltoto wiltoto wiltoto wiltoto wiltoto wiltoto wiltoto wiltoto wiltoto wiltoto wiltoto wiltoto wiltoto wiltoto wiltoto wiltoto wiltoto wiltoto wiltoto wiltoto wiltoto wiltoto wiltoto wiltoto wiltoto wiltoto wiltoto wiltoto toto toto toto toto toto
You've just added this product to the cart: