Subhash Mukhopadhyay

Subhash Mukhopadhyay

सुभाष मुखोपाध्याय

जन्म : 19 फरवरी, 1919 को नदिया, ज़िला—कृष्णनगर, पश्चिम बंगाल में हुआ। अपने अनुभव की ऊर्जा और जिजीविषा को एक समर्थ रचना-शिल्पी की तरह सर्वथा नए रूपाकार में गढ़नेवाले सुभाष मुखोपाध्याय वर्ष 1941 में विश्वविद्यालय स्नातक हो जाने के बाद कम्युनिष्ट पार्टी के कार्यकर्ता और एंटीफासिस्ट राइटर्स एंड आर्टिस्ट एसोसिएशन के सक्रिय सदस्य बन गए। विभिन्न राजनीतिक एवं सामाजिक संगठनों का कार्य किया और कारा-यातना भी भुगती। ‘पदातिक’ (1940) कविता-संकलन ने उनके कवि-रूप को उजागर किया और इसके बाद ‘दृष्टिकोण’ (1948), ‘चिरकुट’ (1950), ‘फूल फुटुक (1961), ‘काल मधुमास’ (1969), ‘एई भाई’ (1971), ‘एकटु पा चालिए, भाई’ (1989), ‘धर्मेर कल’ (1989), ‘जा रे कागजेर नौको’ (1991), ‘एक बार बिदाय दे मा’ (1995) तक की उनकी लम्बी रचना-यात्रा में उनके असंख्य पाठक और प्रशंसक सम्मिलित रहे हैं।

कवि सुभाष की कविता केवल बाङ्ला या भारतीय भाषाओं के मंच पर ही सम्मानित नहीं, विश्व-मंच पर प्रतिष्ठित है। ‘ज्ञानपीठ पुरस्कार, ‘साहित्य अकादेमी पुरस्कार’, ‘आनन्द पुरस्कार’, ‘एफ्रो-एशियन लोटस पुरस्कार’, ‘कबीर सम्मान’, ‘पद्म भूषण’ आदि से सम्मानित। सुभाष मुखोपाध्याय ने यात्रा-वृत्तान्त, आत्मजीवनी, ‘ढोल-गोविन्देर आत्मदर्शन’ और किशोर साहित्य के साथ विपुल अनुवाद-कार्य भी किया है।

निधन : 8 जुलाई, 2003

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