Aadivasi Samaj Aur Sahitya
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Description
आदिवासी समाज और साहित्य
‘आदिवासी समाज और साहित्य’ इस क्षेत्र की विशेषज्ञ रमणिका गुप्ता द्वारा संपादित पुस्तक है। यह अपनी भूमिका से ही सचेत करती है कि आदिवासी समाज को समझने के लिए उनके वाचिक साहित्य को जानना जरूरी है।
के. सच्चिदानंदन, महाश्वेता देवी, डॉ. गणेश एन. देवी, रामदयाल मुंडा, लक्ष्मण गायकवाड़, गोपीचन्द नारंग, हरिराम मीणा, निर्मला पुतुल,
महादेव टोप्पो, डॉ. विनायक तुमराम सहित अनेक महत्त्वपूर्ण लेखकों, समाजशास्त्रियों व विचारकों के आलेखों से सज्जित यह पुस्तक आदिवासी समाज की ओर एक उल्लेखनीय खिड़की बन गई है। इस पुस्तक का उद्देश्य इस समाज की दबा दी गई पहचान को रेखांकित करना भी है।
इस पुस्तक में ‘आदिवासी साहित्य क्यों लिखा जाए’, ‘किसे कहा जाए’, ‘आदिवासी साहित्य क्या है’ या ‘आदिवासी साहित्य कैसा हो’, पर गहन विमर्श ही नहीं किया गया है बल्कि आदिवासी समाज के मूल्यों, उसकी संरचना, उसके अस्तित्व पर मंडराते खतरे और विकास के नाम पर हो रहे विनाश से उपजी समस्याओं पर भी गंभीरता से विचार किया गया है।
रमणिका फाउंडेशन ने आदिवासी साहित्य पर गम्भीर शोध कराया है। अखिल भारतीय आदिवासी लेखक सम्मेलन में सामने आए महत्त्वपूर्ण विचारकों का इस पुस्तक में उल्लेखनीय योगदान है।
इस पुस्तक को आदिवासियों के जमीनी आन्दोलन के बरक्स उनके द्वारा रचित समकालीन साहित्य का घोषणापत्र भी माना जा सकता है। यह इस दिशा में पहला स्थायी महत्त्व का काम है।
Additional information
| Authors | |
|---|---|
| Binding | Paperback |
| ISBN | |
| Language | Hindi |
| Pages | |
| Publishing Year | 2022 |
| Pulisher |











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