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Description
अबुआ राज की चुनौतियाँ
‘अबुआ’ एक संताली शब्द है जिसका सामान्य अभिप्राय प्रायः जनजातियों के संदर्भ में गणतंत्र की सबसे निचली इकाई, ग्राम पंचायत के रूप में लिया जाता है। इस प्रकार, अबुआ राज का मतलब ग्रामीण पंचायती राज व्यवस्था समझा जाए। झारखंड में सदियों पूर्व से जारी इस अबुआ राज व्यवस्था में विगत कुछ दसाब्दियों में चिंताजनक रूप से क्षरण हुआ है। इस पुस्तक में जनजातीय गणतंत्र के इसी प्रथम सोपान के विशेष संदर्भ में उसकी चुनौतियों एवं समस्याओं का जायजा लिया गया है। इस उपक्रम में जनजातीय समाज की परंपरागत संस्थाओं का उल्लेख किया गया है और उसके स्वरूप एवं उसकी कार्यपद्धति पर प्रकाश डाला गया है। जनजातीय समाज की आधी आबादी यानी जनजातीय स्त्रियों की दशा एवं उनकी सामाजिक-सांस्कृतिक-राजनीतिक भागीदारी की भी विशेष चर्चा यहाँ की गई है। जनजातीय लोक संस्कृति को भी इस पुस्तक के आईने में देखा जा सकता है। जनजातीय क्षेत्र में प्राकृतिक संसाधनों की मची लूट पर लेखक की विशेष चिंता परिलक्षित होती है जो पुस्तक की “भूमिका” से ही दिखनी शुरू हो जाती है। एक पठनीय पुस्तक।
Additional information
| Binding | Paperback |
|---|---|
| Authors | |
| ISBN | |
| Language | Hindi |
| Pages | |
| Publishing Year | 2024 |
| Pulisher |











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