Adivasi Aur Hindi Upanyas

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Adivasi Aur Hindi Upanyas

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200.00 150.00

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Author: Ganga Sahay Meena

Availability: 5 in stock

Pages: 216

Year: 2016

Binding: Paperback

ISBN: 9789385450624

Language: Hindi

Publisher: Nayeekitab Prakashan

Description

आदिवासी और हिन्दी उपन्यास

जब सरकार को लगा कि संप सभा के धूणी धाम जागृति का केन्द्र बनते जा रहे हैं और आदिवासियों के मध्य फैल रही जागृति का मतलब सिर्फ उनकी आंतरिक समस्याओं के प्रति जागरुकता तक सीमित न होकर राज के शोषण के खिलाफ चेतना फैलाने तक है तो उसने दमन की नीति अपना ली। जागृति के केन्द्र धूणी धामों को नष्ट करना शुरू कर दिया गया। थावरा गोविंद गुरू को अपराधी जनजाति अधिनियम या जरायमपेशा कानून (1871) के माध्यम से किये जा रहे दमन के बारे में बताते हुए कहता है, ‘जरायम पेशा कानून के तहत संप सभा के कार्यकर्त्ताओं को जागीरदारों व पुलिस द्वारा तंग किये जाने जैसी सूचनाएं इधर–उधर मिली हैं। निर्दोष लोगों को बिना वजह इस कानून के तहत थानों व चैकियों में बुलाया जाता है। उन पर चोरी व लूट के झूठे मुकदमे लगाकर गिरफ्तार करके जुल्म ढाये जा रहे हैं। संप सभा के कार्यकर्ताओं के मनोबल को गिराने के लिए उन्हें थाना–चैकियों में बुलाकर उल्टे–सीधे सवाल पूछे जाते हैं और देर–देर तक वहाँ बिठा लिया जाता है।’

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Paperback

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Language

Hindi

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Publishing Year

2016

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