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Agra Ka Lal Kila Hindu Bhawan Hai
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Author: Purushottam Nagesh Oak
Pages: 283
Year: 2023
Binding: Paperback
ISBN: 0
Language: Hindi
Publisher: Hindi Sahitya Sadan
आगरा का लाल किला हिन्दू भवन है
विषय-क्रम
१. मूल समस्या
२. किले का चिर अतीत हिन्दू मूल
३. शिलालेख
४. लालकिला हिन्दू बादलगढ़ है।
५. किले का हिन्दू साह्चर्य
६. मध्यकालीन लेखकों की साक्षी
७. आधुनिक इतिहासकारों की साक्षी
८. किले का निर्माण-काल अज्ञात है
९. किले का भ्रमण
१०. मूल्य-सम्बन्धी भ्रान्तियाँ
११. निर्माण-कर्ता सम्बन्धी भ्रान्तियाँ
१२. आंग्ल-मुस्लिम इतिहासकारों की समस्या
१३. गज-प्रतिमा सम्बन्धी भयंकर भून
१४. साक्ष्य का सारांश
१५. आधार ग्रन्य-सूची
भूमिका
भारत पर विदेशी शासन के लगभग ११०० वर्षों की अवधि में उसका अधिकांश इतिहास विकृत अथवा विनष्ट कर दिया गया है। | इस विकृति के एक अत्यन्त दुर्भाग्य-सुचक पक्ष का सम्बन्ध मध्यकालीन भवनों और नगरों से है।
भारत में कश्मीर से कन्याकुमारी तक की सभी विशाल, भव्य और मनमोहक ऐतिहासिक हिन्दू संरचनाओं को मात्र अपहरण अथवा विजयों के कारण तुर्क, अफगान, ईरान, अरब, अबीसीनियन और मुगलों जैसे विदेशी मुस्लिम आक्रमणकारियों द्वारा निर्मित कहा जाने लगा है। ऐसी अपहृत संरचनाओं में किले, राजमहल, भवन, सराय, मार्ग, पुल, कुएँ, नहरें और सड़कों के किनारे लगे हुए मील के पत्थर भी सम्मिलित हैं। हिन्दु मन्दिरों, राजमहलों और भवनों के शताब्दियों तक मकबरों और मस्जिदों के रूप में दुरुपयोग ने विश्व-भर की सामान्य जनता, पर्यटकों, इतिहास के छात्रों और विद्वानों को यह विश्वास दिलाकर भ्रमित किया है कि उन भवनों को मलरूप में निर्मित करने का प्रारम्भिक आदेश मुस्लिमों ने ही दिया था। | यह उपलब्धि कि अभी तक जिन मध्यकालीन भवनों का निर्माण-श्रेय विदेशी मुस्लिम आक्रांताओं को दिया जाता है, वे सभी तथ्यतः मुस्लिम-पूर्व काल की हिन्दू संरचनाएँ हैं, एक ऐसी चिरस्थायी खोज है जिसके द्वारा इतिहास और मध्यकालीन शिल्पकला के अध्ययन में युगान्तकारी क्रान्ति हो जानी चाहिए।
इस उपलब्धि को ‘ताजमहल हिन्दू राजभवन है’, ‘फतेहपुर सीकरी एक हिन्दु नगर’, ‘दिल्ली का लालकिला लालकोट है’ तथा ‘आगरे का लालकिला हिन्दू भवन है’ पुस्तकों में भली-भाँति, युक्तिपूर्वक एवं सप्रमाण चरितार्थ किया गया है।
| Authors | |
|---|---|
| Binding | Paperback |
| ISBN | |
| Language | Hindi |
| Pages | |
| Publishing Year | 2023 |
| Pulisher |
पुरुषोत्तम नागेश ओक
जन्म – 2 मार्च 1917
मृत्यु – 4 दिसम्बर 200
शिक्षा : बम्बई विश्वविद्यालय से एम.ए.एल.एल बी.।
जीवन कार्य : एक वर्ष तक अध्यापन कर सेना में भर्ती।
द्वितीय विश्व युद्ध में सिंगापुर में नियुक्त। अंग्रेजी सेना द्वारा समर्पण के उपरान्त आजाद हिन्द फौज के स्थापन में भाग लिया, सैगौन में आजाद हिन्द रेडियो में निदेशक के रूप में कार्य किया।
विश्व युद्ध की समाप्ति पर कई देशों के जंगलों में घूमते हुए कलकत्ता पहुँचे। 1947 से 1974 तक पत्रिकारिता के क्षेत्र में (हिन्दुस्तान टाईम्स तथा स्टेट्समैन में) कार्य किया तथा भारत सरकार के सूचना प्रसारण मंत्रालय में अधिकारी रहे। फिर अमरीकी दूतावास की सूचना सेवा विभाग में कार्य किया।

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