

Aise Bhi Sach Hain Kai

Aise Bhi Sach Hain Kai
₹150.00 ₹112.00
₹150.00 ₹112.00
Author: Suman Jain
Pages: 88
Year: 2014
Binding: Hardbound
ISBN: 9789350723586
Language: Hindi
Publisher: Vani Prakashan
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Description
ऐसे भी सच हैं कई
‘ऐसे भी सच हैं कई’ की कहानियों में सुमन जैन उस अनकहे यथार्थ को केवल देखती ही नहीं हैं बल्कि कहने में भी सफल रही हैं जिसे आमतौर पर व्यक्त करना कठिन है। इसे साधने के लिए जिस कथा-कौशल की अपेक्षा रचनाकार से की जाती है, वह इन कहानियों की लेखिका में है। उन्होंने अपनी कहानियों को उद्देश्यपरक कहा है। यह सोद्देश्यता सायास नहीं है क्योंकि जो वस्तु उन्होंने अपनी कहानियों में विन्यस्त की है, उसकी आन्तरिक आवश्यकता के तहत यह अनायास हुआ है।
मानवीय सम्बन्धों के घात-प्रतिघात से उपजी यह कहानियाँ जीवन की मात्र चित्रात्मक प्रस्तुति नहीं है बल्कि जीवन की सहज गति को पकड़ने वाली ऐसी रचनाएँ जो वास्तव में जीवन को सम्पूर्णता में समझने का अवसर देती हैं।
आजकल मानवीय मूल्यों की पक्षधरता बीते हुए जमाने की बात कही जाती है। इसे अनावश्यक आदर्शवादिता कहकर बचने का प्रयास किया जाता है लेकिन सुमन जैन ऐसे अति आग्रहों से बचकर सम्बन्धों की इस शाश्वत सुगन्ध को बचाना चाहती हैं जो आजकल दुर्लभ हो चली है।
मध्यवर्गीय भारतीय परिवार की नियति को व्यक्त करनेवाली यह कहानियाँ घर-परिवार की दुनिया को प्रत्यक्ष कर देती हैं। तार्किक संवेदना इन भाव प्रणव कहानियों की विशेषता है। स्त्री-पुरुष के राग-विराग को रचने वाली इन कहानियों की दुनिया छोटी लेकिन वास्तविक है। यह पाँच कहानियाँ सम्बन्धों के धरातल पर ही मनुष्य की जिजीविषा को परखती हैं और अन्ततः यह सिद्ध करती हैं कि सम्बन्धों के अभाव में मनुष्य और कुछ भी भले बन जाए लेकिन मनुष्य नहीं बना रह सकता।
Additional information
| Authors | |
|---|---|
| Binding | Hardbound |
| ISBN | |
| Language | Hindi |
| Pages | |
| Publishing Year | 2014 |
| Pulisher |









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