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Description
और सिर्फ तितली
प्रदीप सौरभ का नया उपन्यास ‘और सिर्फ तितली’, पब्लिक स्कूली शिक्षा की भीतरी परतों को एक-एक कर खोलते हुए पब्लिक स्कूली शिक्षा जगत के अन्दर की खुशबू और सड़ांध को कुछ इस तरह पेश करता है कि आप पहली बार इस अनजाने, अनकहे जगत के समक्ष खड़े हो जाते हैं और अपने आप से पूछने लगते हैं कि आखिर वे क्या कारण हैं जिनके चलते हमारी स्कूली शिक्षा और शिक्षण पद्धति अपनी सारी चमक-दमक और दावों के, इस कदर खोखली और संस्कार विहीन हो चली है ?
छोटे-छोटे बच्चों की मासूमियत, उनकी जिज्ञासाएँ, उनकी ज्ञान-पिपासा, उनका सोच-विचार, उनकी रचनात्मकता, उनका साहस, उनकी प्रयोग-प्रियता किस तरह से कुंठित होती जाती है? किस तरह से सुयोग्य, अच्छे और गुणी अध्यापक और अध्यापिकाएँ अपने संस्थान के प्रबन्धन की दोहन एवं शोषणनीति के चलते उत्साह विहीन होते जाते हैं। किस तरह से उनका शोषण किया जाता है। किस तरह वे आपसी मनमुटाव, टुच्ची, गुटबाजी भरी राजनीति के चलते अपने सपनों को चकनाचूर होते देख मनोरोगों तक के शिकार होते रहते हैं? और किस तरह शिक्षा के इस महँगे तिलिस्म का कोई तोड़ नहीं है? और अगर कोई उसे तोड़ने की कोशिश करता है तो उसका क्या हश्र होता है, इन्हीं तमाम पहलुओं पर यह उपन्यास दिलचस्प शैली में रौशनी डालता है। उपन्यास की खासियत यह है कि आप उसे एक ही सिटिंग में पढ़ते चले जा सकते हैं। यही प्रदीप सौरभ की कथा-कलम की विशेषता है।
Additional information
| Authors | |
|---|---|
| Binding | Hardbound |
| ISBN | |
| Language | Hindi |
| Publishing Year | 2015 |
| Pages | |
| Pulisher |











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