Baul Kavi Lalan Shah : Sadhna Aur Sahitya
₹400.00 ₹350.00



₹400.00 ₹350.00
₹400.00 ₹350.00
Author: Rameshwar Mishra
Pages: 400
Year: 2021
Binding: Paperback
ISBN: 9789355180469
Language: Hindi
Publisher: Vani Prakashan
बाउल कवि लालन शाह : साधना और साहित्य
बाउल साधक-कवि लालन शाह (1774-1890 ई.) सम्पूर्ण बंगाल (प. बंगाल और बांग्लादेश) में श्रेष्ठ मानवतावादी विचारों के गायक के रूप में प्रतिष्ठित हैं। बंगाल में रवीन्द्र-संगीत, नजरुल-गीति की तरह बाउल संगीत और लालन साँई के गान भी अत्यन्त लोकप्रिय हैं। बाउल सम्प्रदाय का उद्भव 1650 के आसपास माना जाता है। यह सम्प्रदाय बंगाल में प्रचलित बौद्ध-सिद्धों तथा नाथयोगियों की हठयोगी साधना, वैष्णव सम्प्रदाय की भक्तिभावना एवं सूफ़ी सम्प्रदाय की प्रेमभावना का मिश्रित विकसित रूप है। बाउल सम्प्रदाय प्रेमोन्मादी, भावोन्मादी सम्प्रदाय है।
बाउल गायक विशेष प्रकार की वेशभूषा, केशविन्यास, विशेष सुर और वाद्य (एकतारा, डुगडुगी) के साथ नृत्य (धुंघरू सहित) और गायन के द्वारा अपनी भावाभिव्यक्ति करते हैं। इनकी वाणियों में एक ओर ‘मनेर मानुष’ (मन का मनुष्य) की खोज है तो दूसरी ओर जाति-पाँति, छुआछूत एवं कर्मकाण्ड तथा बाह्याडम्बरों से असहमति प्रकट की गयी है। लालन शाह ने बाउल साधना और बाउल संगीत को नयी ऊँचाई दी। अखण्ड बंगाल की सांस्कृतिक चेतना में लालन फकीर का विशिष्ट स्थान है। वस्तुतः लालन विश्वजनीन मानव महिमा के गायक हैं। जहाँ मनुष्य से श्रेष्ठ कुछ भी नहीं है। जाति, धर्म, कुल, समाज और सम्प्रदाय मनुष्यता के सामने तुच्छ हैं।
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| Binding | Paperback |
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| Language | Hindi |
| Pages | |
| Publishing Year | 2021 |
| Pulisher |
रामेश्वर मिश्र
जन्म : दिसम्बर 1953
शिक्षा : प्रारम्भिक शिक्षा-दीक्षा पश्चिम बंगाल के कोयलांचल रानीगंज में। विश्वभारती, शान्तिनिकेतन से एम.ए. (हिन्दी) तथा पी-एच.डी. (1982)। 1981 से नवम्बर 2020 तक विश्वभारती के हिन्दी विभाग में अध्यापन।
इस कालावधि में विश्वभारती में हिन्दी भवन के अध्यक्ष, भाषा भवन के संकायाध्यक्ष, इन्दिरा गाँधी राष्ट्रीय एवं अन्तरराष्ट्रीय समन्वय केन्द्र के निदेशक, संकटापन्न भारतीय भाषाएँ केन्द्र के अध्यक्ष, विश्वभारती पत्रिका के सम्पादक एवं आन्तरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ के अध्यक्ष पदों का भी कार्यभार सँभाला। विश्वभारती में विद्वत् परिषद् एवं कार्यसमिति के सदस्य के अतिरिक्त देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों में पाठ समिति, शोध समिति एवं चयन समिति के सदस्य के रूप में कार्य किये। सम्प्रति अखिल भारतीय साहित्य परिषद् की पश्चिम बंगाल शाखा के अध्यक्ष।

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