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Description
बुरी औरत की दूसरी कथा
यह पुस्तक अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान रखने वाली लब्ध प्रतिष्ठित नारीवादी उर्दू कवयित्री एवं स्तम्भकार किश्वर नाहीद की आत्मकथा का दूसरा और अन्तिम भाग है, जो सिर्फ़ आत्मकथा नहीं है बल्कि आत्मकथा के बहाने इसमें पाकिस्तान के राजनीतिक उतार-चढ़ाव, धर्म के अच्छे-बुरे चेहरों, सत्ता प्रमुख के तौर पर सेनाध्यक्षों के चरित्रों, आधुनिक एवं रूढ़िवादी विचारों के टकरावों, समलैंगिकता के बढ़ते प्रभावों, एमक़्यूएम के कारनामों, शासनाध्यक्षों की हत्याओं, साहित्यकारों के धूप-छांव किरदारों, समाज में जीवन स्तर के बदलते स्वरूपों, महिलाओं और बच्चों की सामाजिक स्थितियों, आतंकवादी गतिविधियों और नशीली वस्तुओं के दुष्परिणामों, ऐतिहासिक एवं पर्यटन स्थलों से सम्बन्धित जानकारियों, भारत-पाक सन्बन्ध-सुधार की कोशिशों, फ़िल्म, ललित कला एवं संस्कृति से जुड़े सेलिब्रिटीज़ की ज़िन्दगियों और नयी-पुरानी पीढ़ियों में बदलते मूल्य-संघर्षों के साथ-साथ भारत-पाक की सांस्कृतिक समानताओं के बीच जहाँ एक तरफ़ आम आदमी की व्यथा कथा है वहीं दूसरी ओर धर्म, राजनीति और सेना की बन्दरबाँट में फँसे पाकिस्तान की लोकतान्त्रिक अवाम की बेबसी को बयान करती है जो पाठक के लिए पाकिस्तान को देखने-समझने की तुलनात्मक दृष्टि प्रदान करती है। इस आत्मकथा की एक विशेषता यह भी है कि इसमें लेखिका ने अपनी निजी ज़िन्दगी, साहित्यिक सफ़र, राजनीतिक विचारधारा, धार्मिक मान्यताओं, फिलिस्तीन समस्या तथा रक्त सम्बन्धियों में विवाह तथा ह्यूमन राइट्स आदि पर बेबाकी से अपनी बात कही है,और तो और अपने और ख़ुदा के आपसी रिश्ते के आधार पर धर्म की अपनी व्याख्या भी की है।
Additional information
| Authors | |
|---|---|
| Binding | Paperback |
| ISBN | |
| Language | Hindi |
| Pages | |
| Publishing Year | 2026 |
| Pulisher |











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