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Description
भारतीय मनीषा की विश्वचर्या
प्रस्तुत पुस्तक भारतीय संस्कृति के विश्वव्यापी स्वरूप के विविध आयामों को आलोकित करती है। आज से सात हजार वर्ष पूर्व सूती वस्त्र और शर्करा के आविष्कार से भारतीय व्यापार दूर-दूर तक प्रभावी बना। भगवान राम की इक्ष्वाकुवंश शर्करा निर्यात (ईख-गन्ना) से संपन्न था। अवेस्ता में राम का उल्लेख है। अफगानिस्तान में बामियान और कक्राक् की विराट् प्रतिमाएँ और 1900 तक अफगानिस्तान में वैदिक उपासनाओं का प्रचलन सुरक्षित था।
प्राचीन तुर्की भाषा में संस्कृत ग्रंथों के भाषांतर, बुखारा विहारों की नगरी थी, कज़ाकस्तान और किर्गिस्तान में मंदिर और संस्कृत शिलालेख । इसी प्रकार चीन, कोरिया, जापान, तिब्बत, भूटान मंगोलिया, वीयतनाम में भारत के ज्ञानसंभार की उष्णीष विजय हैं। यह भारतभारती की विशाल आविष्कृति डॉ. लोकश चंद्र की अस्सी वर्ष की विद्या साधना है।
Additional information
| ISBN | |
|---|---|
| Authors | |
| Binding | Paperback |
| Language | Hindi |
| Pages | |
| Publishing Year | 2026 |
| Pulisher |











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