-24%
Bhartiya Sahityashatra
₹450.00 ₹340.00



₹450.00 ₹340.00
₹450.00 ₹340.00
Author: Brahma Dutt Sharma
Pages: 180
Year: 2020
Binding: Hardbound
ISBN: 9789389742107
Language: Hindi
Publisher: Lokbharti Prakashan
भारतीय साहित्यशास्त्र
प्रस्तुत पुस्तक में डॉ. ब्रह्मदत्त शर्मा ने हिन्दी समीक्षा के मूल तक जाने का प्रयत्न किया है और अग्निपुराणकार, भरत, दण्डी, आनन्दवर्द्धन, वामन, कुन्तक एवं क्षेमेन्द्र की मान्यताओं और मतों को बोधगम्य बनाने का प्रयास किया है। भारतीय चित्त एवं मानस में ये मान्यताएँ इतनी रची-बसी हैं कि सामान्य पाठक भी कविता पढ़ते समय स्वभावतः यह प्रश्न करता है कि कविता किस रस की है, इसमें कौन से अलंकार हैं, कौन-सी वक्रता है तथा उससे क्या व्यंजित हो रहा है। प्रस्तुत पुस्तक में सभी भारतीय सम्प्रदायों की मान्यताओं का विवेचन उपरोक्त प्रश्नों के सन्दर्भ में किया गया है।
इन गम्भीर प्रश्नों का विवेचन भी सभी भारतीय साहित्य सम्प्रदायों के परिप्रेक्ष्य में इस पुस्तक में पाठकों को मिलेगा।
| Authors | |
|---|---|
| Binding | Hardbound |
| ISBN | |
| Language | Hindi |
| Pages | |
| Publishing Year | 2020 |
| Pulisher |
ब्रह्मदत्त शर्मा
डॉ. ब्रह्मदत्त शर्मा उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जनपद में 1 मई, 1941 को जन्मे डॉ. ब्रह्मदत्त शर्मा कुमायूँ विश्वविद्यालय, नैनीताल के अंग्रेजी विभाग के आचार्य एवं अध्यक्ष पद से सेवा निवृत्त हुए। तत्पश्चात् उन्होंने ताइज़ विश्वविद्यालय, यमन में अंग्रेजी के आचार्य एवं अध्यक्ष के रूप में सेवाएँ दीं। प्रो. शर्मा पाँच वर्षों तक कुमायूँ विश्वविद्यालय के नैनीताल परिसर के निदेशक भी रहे।
आप अंग्रेजी साहित्य के साथ-साथ हिन्दी में भी परास्नातक हैं। अमेरिकन साहित्य में अपनी पी-एच.डी. तथा डी.लिट् उपाधियाँ मेरठ विश्वविद्यालय से प्राप्त की हैं व साथ ही केन्द्रीय अंग्रेजी संस्थान, हैदराबाद से डिप्लोमा प्राप्त किया है।

Reviews
There are no reviews yet.