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Description
भुवनेश्वर
हिन्दी के प्रतिभासंपन्न नाटककार और साहित्यकार भुवनेश्वर (पूरा नाम भुवनेश्वर प्रसाद श्रीवास्तव) की जन्मतिथि ही नहीं, जन्मवर्ष भी विवादग्रस्त रहा है। यह कहीं 1910 तो कहीं 1914 बताया गया है। उनके पिता का नाम ओंकारबख्श था। माता की मृत्यु तभी हो गई, जब भुवनेश्वर केवल डेढ़ साल के थे। निम्नवित्त परिवार में अभा और असुविधाओं से निरंतर जूझते हुए उनका अभिशप्त जीवन कभी सामान्य नहीं हो पाया।
हिन्दी के चर्चित, विवादास्पद, विलक्षण सर्जनशील एवं अध्ययन-समपन्न इस रचनाधर्मी कवि, कथाकार, एकांकीकार, असंगत नाटककार, आलोचक, सम्पादक और चित्रकार का व्यक्तित्व इतने रूपकारों में ढला है कि किसी के लिए यह विश्वास करना आज भी कठिन हो सकता है कि एक साथ कई विधाओं में कोई रचनाकार प्रवृत्त हो सकता है-और वह भी इतनी प्रतिकूल स्थितियों में।
भुवनेश्वर ने छायावादी युग में भी साहित्य की मूल धारा से हटकर सर्वथा नवीन और मौलिक उद्भावनाओं के साथ अपने नाटकों को व्यंग्यमुखरित किया। उनकी एकांकियों में भी जहाँ प्रयोगात्मकता है, वहाँ सामाजिक चेतना और मंच को एक सामाजिक कर्म बनाने की सार्थक पहल भी है। उनकी कृतियों में जहाँ एक तरह की नाराज़गी मिलती है, वहाँ दुनिया की समझदारी भी। यह बात हमें और भी हैरान करती है कि उनमें निराशा या हताशा का स्वर नहीं, बल्कि दुर्दम्य जिजीविषा और आक्रामक प्रणवत्ता है। अपनी भाषा, रचना की अर्न्तवस्तु और उसके बाह्य निरूपण में वे अप्रतिम हैं। यही कारण है कि अपने समकालीन या परवर्ती नाटककारों में भी उनकी टक्कर का कोई दूसरा नाटककार हिन्दी को अभी तक प्राप्त नहीं हो सका है। वे अपने नाटकों में हर फॉर्म को तोड़ते हैं और उन्हें फिर रचते हैं। इस तरह न वे परम्पराधर्मी हैं, न क्रान्तिकारी हैं, न अस्वीकारवादी औ न अस्तित्ववादी।
Additional information
| Authors | |
|---|---|
| Binding | Paperback |
| ISBN | |
| Language | Hindi |
| Pages | |
| Publishing Year | 2019 |
| Pulisher |











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