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Description
बुंदेलखंड में स्त्री
आनन्द प्रकाश त्रिपाठी द्वारा संपादित ‘बुंदेलखंड में स्त्री’ इतिहास, समाज और संस्कृति के आइने में स्त्री के अस्तित्व और अस्मिता की एक सार्थक पहचान करने का रचनात्मक प्रयास है।
बुंदेलखंड में स्त्री की गौरवपूर्ण उपस्थिति के तीनों स्तर राजकुल की स्त्रियां, कला-साहित्य को समर्पित प्रतिभाएं और आमजन के बीच से स्त्रियां, इस महत्त्वपूर्ण ग्रंथ में अध्ययन का विषय बने हैं। इतिहास और समाज, लोक और साहित्य, संस्कृति और कला, व्यक्तित्व और कृतित्व तथा परिशिष्ट के माध्यम से यह प्रयास किया गया है कि बुंदेलखंड की स्त्री को वस्तुपरक ढंग से विश्लेषित किया जाए।
दुर्गावती, लक्ष्मीबाई, अवंतीबाई, गणेश कुंवरि, मस्तानी, प्रवीण राय, कमल कुंवरि, असगरीबाई आदि बुंदेलखंड की स्त्री-छवि की पहचान हैं। इतिहास ग्रंथों में राज एवं लोकहित की दृष्टि से उल्लेखनीय कार्य करने वालों को स्थायी जगह मिली है तो आम जीवन की स्त्रियों के संघर्ष का उल्लेख लोक साहित्य में मिलता है। संस्कृति और कला के क्षेत्र में बुंदेली स्त्री अपनी संपूर्ण गरिमा के साथ उपस्थित है। वहां उसका सौंदर्य, सर्जना और श्रमशील रूप लोकनृत्यों, स्थापत्य कलाओं और गाथाओं में विद्यमान है।
बुंदेलखंड की इस थाती के मर्मज्ञ विद्वानों के लेखों से सजी इस पुस्तक का कुशल संपादन कर प्रो. आनन्द प्रकाश त्रिपाठी ने एक संग्रहणीय ग्रंथ तैयार किया है। शोधार्थियों, छात्रों और आम पाठकों के लिए यह ग्रंथ समान रूप से पठनीय है।
Additional information
| Authors | |
|---|---|
| Binding | Hardbound |
| ISBN | |
| Language | Hindi |
| Pages | |
| Publishing Year | 2012 |
| Pulisher |











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