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Description
चार कन्या
चार कन्या चार कन्या में यमुना, शीला, झूमुर और हीरा की कथा है। यमुना एक मामूली लड़की है, उसके भीतर बूँद-बूँद कर जन्म लेती है। अपने अधिकारबोध के प्रति तीव्र जागरूकता। ऐसी सुलझी हुई जागरूक लड़कियों को काफी कुछ भुगतना पड़ता है। समाज के उल्टे–सीधे नियम उन्हें बहुत सताते हैं, यमुना को भी खूब सताया। शीला ठगी जाती है अपने प्रेमी द्वारा। ऐसी सैकड़ों शीलाएँ राह में चल-फिर रही हैं पर सभी तो अपनी जुबान पर वे बातें नहीं ला सकतीं क्योंकि इससे ठगनेवालों पर प्रहार की बजाय शीलाओं पर ही उल्टी मार पड़ती है। समाज उन्हीं पर पत्थर फेंकता है, उनके ही मुँह पर थूकता है। लज्जा जैसी चर्चित कृति की लेखिका तसलीमा नसरीन का यह उपन्यास स्त्री-विमर्श की कई खिड़कियाँ खोलता है, जिससे आती बयार से पाठक अछूता नहीं रह सकता।
Additional information
| Authors | |
|---|---|
| Binding | Paperback |
| ISBN | |
| Language | Hindi |
| Pages | |
| Publishing Year | 2016 |
| Pulisher |











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