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Description
छाबिन आलुन – कारबि रामायण
भूमिका
कारबि समाज और छाबिन आलुन
असम और पूर्वोत्तर भारत अनेक जाति-उपजाति का निवास स्थान है। इन-जाति उपजातियों के बारे में शेष भारत के लोग बहुत कम जानते हैं अथवा बिल्कुल नहीं जानते। राजनैतिक परिप्रेक्ष्य में वर्तमान पूर्वोत्तर भारत सात प्रदेशों में विभाजित हैं। ये हैं – असम, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय, नागा-भूमि, मणिपुर, मिजोरम, और त्रिपुरा। पूर्वोत्तर भारत अनेक पर्वत पहाड़, नद-नदियाँ, तथा समतल घाटियों से भरा पड़ा है। इन पहाड़-पर्वत तथा घाटियों में अनेक गिरिवासी-वनवासी जाति-उपजाति निवास करते हैं। इन सभी गिरिवासी-वनवासी जाति-उपजातियों की अपनी-अपनी भाषाएँ और संस्कृति आज भी गतिमान हैं। इन सभी जनजातियों में लोक साहित्य और लोक-संस्कृति का अनमोल भण्डार है।
असम के मध्य प्रांत में “कारबि-आंगलं” नाम की एक पार्वत्य भूमि है। वास्तव में यह है अनेक छोटे-बड़े पहाड़ों की एक समष्टि। इस पहाड़ को “मिकिर पहाड़” और इस पहाड़ के निवासियों को “मिकिर” कहा जाता था।
वर्तमान में वे लोग अपने को कारबि तथा अपने निवास-स्थान को “कारबि आंगलं” कहने लगे हैं। आज यह गिरिवासी जाति कारबि नाम से ही प्रख्यात है।
कारबि लोग मूलतः मिरिवासी तो हैं, पर युग-युग से अनेक कारबि लोग असम के विभिन्न जिलों के समतल क्षेत्रों में निवास करते आये हैं। इस जाति की अपनी भाषा और संस्कृति है। कारबि समाज की परंपरागत संस्कृति के साथ भारतीय सनातन संस्कृति की पर्याप्त समानताएँ हैं। समय के दुष्प्रभाव से प्रेरित एवं सामाजिक तथा आर्थिक समस्याओं से जर्जर होकर अनेक कारबि लोग अपनी परंपरा छोड़कर ईसाई बन गये हैं; लेकिन अभी भी अधिकांश कारबि लोग अपनी परंपरा पर अटल हैं और अपने को हिन्दू के रूप में परिचय देकर गर्व अनुभव करते हैं। कारबि जाति की उत्पत्ति तथा विस्तार के बारे में अनेक दंतकथाएँ प्रचलित हैं। कुछ विद्वानों का कहना है कि कारबि लोग चीन-बर्मा (म्यान्मार) आदि देशों से आकर यहाँ बस गये, क्योंकि कारबि सभ्यता और संस्कृति में इण्डो-मंगोलियन उपादान अधिक हैं। अगर हम गहराई से अध्ययन तथा विचार करें तो ये किरात वंशज हैं और असम के भूमि पुत्रों में एक हैं। इस संदर्भ में पुराणों की एक कहानी को आधार के रूप में लिया जा सकता है, इसके साथ इस परंपरा में प्रचलित एक दंतकथा का भी बहुत सुन्दर संपर्क है।
Additional information
| Authors | |
|---|---|
| Binding | Hardbound |
| ISBN | |
| Language | Assamese Text With Hindi Translation |
| Pages | |
| Publishing Year | 2000 |
| Pulisher |











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