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Chal Khusro Ghar Aapne

Chal Khusro Ghar Aapne
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Author: Mithileshwar
Availability: Out of stock
Pages: 115
Year: 2000
Binding: Paperback
ISBN: 8126306254
Language: Hindi
Publisher: Bhartiya Jnanpith
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Description
चल खुसरो घर आपने
इस संग्रह की कहानियों में आज का गाँव है—अपने सारे राग-विराग, सुख-दुःख के साथ। शहरी संस्कृति ने जिस तरह मानवीय संवेदनाओं को विकृत किया है उसका विद्रूप असर गाँव के सिवानों तक भी फैल चुका है। नतीजतन अपसंस्कृति और अजनबीपन ने नगरों की तरह ही गाँवों में भी रिश्तों की गरमाहट को कम किया है। दरअसल गाँवों-क़स्बों के इस बदलते जीवन और परिवेश के यथार्थ को ही मिथिलेश्वर की ये कहानियाँ पूरी संवेदनशीलता के साथ बुनती और अभिव्यक्त करती हैं।
Additional information
| Authors | |
|---|---|
| Binding | Paperback |
| ISBN | |
| Language | Hindi |
| Pages | |
| Publishing Year | 2000 |
| Pulisher |









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