Chhaya Sach

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360.00 260.00

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360.00 260.00

Author: Santosh Dixit

Availability: 5 in stock

Pages: 240

Year: 2025

Binding: Paperback

ISBN: 9789362016782

Language: Hindi

Publisher: Setu Prakashan

Description

छाया सच

सुपरिचित कथाकार संतोष दीक्षित का उपन्यास ‘छाया सच’ यों तो भारतीय इतिहास के एक ख़ास दौर की दास्तान है लेकिन कई मायनों में यह ठेठ या रूढ़ ऐतिहासिक उपन्यास से अलग भी है। दरअसल इसकी कथावस्तु और इसका आख्यान, इतिहास की सतह के नीचे का इतिहास है, जिसे साधारण लोग बनाते हैं। कथाभूमि पटना और उसके आसपास की है और चित्रित कालखण्ड वीर कुँवर सिंह की शहादत तथा अठारह सौ सत्तावन के ग़दर के बाद का है, जब ईस्ट इण्डिया कम्पनी का राज ख़त्म हो गया और भारत का शासन सीधे ब्रिटेन से निर्देशित होने लगा। यह आम धारणा है कि अठारह सौ सत्तावन का विद्रोह कुचल दिये जाने के बाद बहुत लम्बे समय तक ख़ामोशी रही। रेलवे तथा डाक-तार के प्रसार के साथ अँग्रेज़ी शासन अपनी क्षमता बढ़ा रहा था, लेकिन इसी दौरान उसने आर्म्स एक्ट तथा वर्ना क्यूलर प्रेस एक्ट जैसे दमनकारी क़ानून भी बनाये। उपन्यास दिखाता है कि ग़दर का गला घोंट दिये जाने के बाद भी लोक में अँग्रेज़ी राज के प्रति घृणा और प्रतिकार की चेतना सक्रिय रही। अलबत्ता सामन्त जमींदार और अन्य अभिजन तत्कालीन हुकूमत से हिल-मिलकर अपने स्वार्थ साधने व आम लोगों के शोषण-उत्पीड़न में सहभागी बने रहे।

उपन्यास उस समय के एक लगभग अलक्षित आयाम को उजागर करता है, यह दिखाता है कि समाज के ऊपरी तबके ने भले समझौता कर लिया हो लेकिन जन-समाज गुलामी के दंश को कभी भूला नहीं और किसी न किसी स्तर पर उसके प्रतिरोध की हलचल हमेशा बनी रही। और सबसे रोचक पहलू यह है कि इसमें बहरुपिये, पहलवान, गुण्डे, भाँड जैसे समाज की मुख्यधारा से किनारे के तत्त्वों ने बहुत अहम भूमिका निभायी और कुर्बानी भी दी।

गौरतलब है कि उपन्यास की कथा एक भाँड या तमाशा-कलाकार बिन्देश्वरी और ज्वाला नामक पहलवान के इर्द-गिर्द घूमती है और इन्हें ही नायकत्व प्रदान करती है। दिलचस्प पात्रों के अलावा आकर्षक वर्णन व अभिनव शिल्प भी इस उपन्यास को बेहद पठनीय बनाते हैं।

Additional information

Authors

Binding

Paperback

ISBN

Language

Hindi

Pages

Publishing Year

2025

Pulisher

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