Chhayawad
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छायावाद
छायावाद पर अनेक पुस्तकों के रहते हुए भी यह पुस्तक दृष्टि की मौलिकता; विवेचन की स्पष्टता तथा आलोचना-शैली की सर्जनात्मकता के लिए पिछले दशक की सबसे लोकप्रिय पुस्तक रही है।
लेखक के अनुसार इस पुस्तक में छायावाद की काव्यगत विशेषताओं को स्पष्ट करते हुए छाया-चित्रों में निहित सामाजिक सत्य का उद्घाटन किया गया है। पुस्तक में कुल बारह अध्याय हैं जिनके शीर्षक क्रमशः इस प्रकार है : प्रथम राशी, केवल में केवल में, एक कर दे पृथ्वी आकाश, पल-पल परिवर्तित प्रकृति वेश, देवि मान-सहचरी प्राण, जागो फिर एक बार, कल्पना के कानन की रानी, रूप विन्यास, पद विन्यास, खुल गए छंद के बंध, जिसके आगे रह नहीं, तथा परंपरा और प्रगति।
Additional information
| Authors | |
|---|---|
| Binding | Text |
| ISBN | |
| Pages | |
| Publishing Year | 2024 |
| Pulisher | |
| Language | Hindi |











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