Doordarshan : Hindi Dharavahik Evam Nari
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Description
दूरदर्शन : हिन्दी धारावाहिक एवं नारी
प्रस्तुत पुस्तक दूरदर्शन की समाज सापेक्ष नीतियों और साहित्य, कला, संस्कृति के प्रति निष्ठ प्रतिबद्धताओं का निष्पक्ष, अनूठा और अद्भुत तुलनात्मक आकलन है जो नितांत भिन्न दो विधाओं साहित्य और चाक्षुस की सामर्थ्य और उसकी चेतना पूर्ण अभिव्यक्ति को तत्कालीन समाज के आलोक में विवेचित करने की सफल चेष्टा ही नहीं करता है, बल्कि अपनी अद्भुत विवेच्य क्षमता से चमकृत कर देता है। सर्वथा अलग और संभवतः पहली बार ऐसा श्रमसाध्य और चुनौतीपूर्ण विषय उठाया गया है जो लेखक से गहन अध्ययनशीलता की मांग ही नही करता बल्कि उससे आधी दुनिया यानि अब तक हाशिए पर रही भारतीय नारी के धरती-आकाश के अंधेरों-उजालों की क्रूरतम स्तिथियों के खनन और अन्वेषण की भी ईमानदार मांग करता है और उसे लेखक ने पूरी ईमानदारी से अंजाम भी दिया है।
जिन कालजयी साहित्य कृतियों के स्त्री पात्रों तुलनात्मक अध्ययन प्रस्तुत पुस्तक के माध्यम से किया गया है, वह समय निश्चय ही दूरदर्शन के इतिहास का सुनहरा समय कहा जाएगा (सन् 1986-95) और उस समय का आकलन निबद्ध हुआ है इस पुस्तक में। वह वक्त पुन: लौटा है दूरदर्शन पर ‘ इंडियन क्लासिकल ‘ के रूप में। 15 भारतीय भाषाओं की कालजयी साहित्य कृतियों पर स्वयं दूरदर्शन द्वारा निर्मित धारावाहिकों के माध्यम से। मुझे लगता है कि श्री विजयेश्वर मोहन जी ही वह एकमात्र लेखक है जो पूरी प्रामाणिकता के साथ दूरदर्शन द्वारा साहित्य कृतियों पर निर्मित धारावाहिकों के नारी पात्रों को लेकर दस्तावेजी कृति की अगली कड़ी लिख सकते है – मुझे उस इतिहास की प्रतीक्षा है………
– चित्रा मुद्गल
Additional information
| ISBN | |
|---|---|
| Authors | |
| Binding | Hardbound |
| Language | Hindi |
| Pages | |
| Publishing Year | 2019 |
| Pulisher |











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