-23%
Ganga Biti (Gangu Teli Ki Jabani)
₹172.00 ₹132.00



₹172.00 ₹132.00
₹172.00 ₹132.00
Author: Gyanendrapati
Pages: 188
Year: 2019
Binding: Paperback
ISBN: 9788194008729
Language: Hindi
Publisher: Setu Prakashan
गंगा-बीती (गंगू तेली की जबानी)
‘गंगा-बीती’ में कवि गंगा के जल-दर्पण और एक गांगेय नगर के मन-दर्पण में अपने समय के अक्स को खुली आँखों देख रहा है। साक्षी-भाव जिस निष्कम्प निर्भीकता की अपेक्षा करता है उस को कबीर की इस नगरी ने ही उसमें प्रगाढ़ किया है। वह किसी के मुकाबिल नहीं, न किसी काबिल है, उसे पता है बखूबी; कोई भोज-भक्त उसे चेताए इसके पहले ही उसे मालूम है कि उसकी औकात गंगू तेली की है, बस, गंगा किनारे का गंगू; यह एहसास ही उसके आत्म-गौरव की जमीन है। ये कविताएँ हर उस की हैं जो युग-सत्य तक संवेदना के रास्ते पहुँचना चाहता है।
| Binding | Paperback |
|---|---|
| Authors | |
| ISBN | |
| Language | Hindi |
| Pages | |
| Publishing Year | 2019 |
| Pulisher |
ज्ञानेन्द्रपति
जन्म झारखण्ड के एक गाँव पथरगामा में, पहली जनवरी, 1950 को, एक किसान परिवार में।
पटना विश्वविद्यालय से पढ़ाई।
दसेक वर्षों तक बिहार सरकार में अधिकारी के रूप में कार्य।
नौकरी को ‘ना करी’ कह, बनारस में रहते हुए, फ़क़त कविता-लेखन।
प्रकाशित कृतियाँ : आँख हाथ बनते हुए (1970), शब्द लिखने के लिए ही यह काग़ज बना है (1981), गंगातट (2000, 2021), संशयात्मा (2004), भिनसार (2006, 2021), कवि ने कहा (2007), मनु को बनाती मनई (2013), गंगा-बीती : गंगू तेली की ज़बानी (2019), कविता भविता (2020) (कविता-संग्रह); एकचक्रानगरी (2021), (काव्य-नाटक); पढ़ते-गढ़ते (कथेतर गद्य)।

Reviews
There are no reviews yet.