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Description
हरिया हरक्यूलीज की हैरानी
पहले बिरादरी को हैरानी हुआ करती थी कि हरिया को किसी बात से हैरानी क्यों नहीं होती, लेकिन अचानक हरिया के सामने हैरानी का दरवाज़ा जो खुला तो वह हैरानी के तिलिस्म में उतरता ही चला गया। यहाँ तक कि बिरादरी की हैरानियों पर भारी पड़ने लगा। हैरानी को लेकर जितनी व्याख्याएँ लोगों के पास थीं, वे कहानियों की शक्ल में बहने लगीं। और तब सवाल उठा इन कहानियों को सुरक्षित रखने, बिरादरी के विरसे में शामिल करने का। बुजुर्गों को चिन्ता हुई कि कहीं ये कहानियाँ आपस ही में टकराकर खत्म न हो जाएँ। लेकिन बिरादरी के एक मेधावी युवक ने उन्हें भरोसा दिलाया कि हरिया की हैरानी हमेशा रहेगी क्योंकि हैरानी के बिना कहानी नहीं होती और कहानी के बिना बिरादरी नहीं होती।
जोशीजी के अद्भुत शिल्प और कथा-कौशल की नुमाइंदगी करता हुआ एक अलग ढंग का उपन्यास।
Additional information
| Authors | |
|---|---|
| Binding | Paperback |
| ISBN | |
| Language | Hindi |
| Pages | |
| Publishing Year | 2024 |
| Pulisher |











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