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Itihas Parampara Aur Aadhunikta
₹350.00 ₹260.00



₹350.00 ₹260.00
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Author: Vidyaniwas Mishra
Pages: 147
Year: 2015
Binding: Hardbound
ISBN: 9789350729953
Language: Hindi
Publisher: Vani Prakashan
इतिहास परम्परा और आधुनिकता
समाज की काल चेतना से जुड़कर ‘इतिहास,परंपरा और आधुनिकता’ जैसी अवधारणाओं ने आज अनेक अर्थ ग्रहण कर लिए हैं और इनकी व्याख्या और उपयोग का दायरा बंता बिगड़ता रहा है। आमतौर पर संस्कृति में होने वाले परिवर्तन और उसकी निरंतरता को आत्मसात करने के लिए इन शब्दों का व्यवहार किया जाता है।
प्रस्तुत पुस्तक में जो विचार उभरे हैं वे निर्विवाद रूप से इस तथ्य की ओर संकेत करते हैं कि बिना विचारे पशिम का अंधानुकरण भारतीय समाज को आगे नहीं ले जा सकता।
| Authors | |
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| Binding | Hardbound |
| ISBN | |
| Language | Hindi |
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| Publishing Year | 2015 |
| Pulisher |
विद्यानिवास मिश्र
पं. विद्यानिवास मिश्र (1926-2005) हिन्दी और संस्कृत के अग्रणी विद्वान, प्रख्यात निबंधकार, भाषाविद् और चिन्तक थे। आपका जन्म गोरखपुर जिले के ‘पकड़डीहा’ ग्राम में हुआ। प्रारम्भ में सरकारी पदों पर रहे। तत्पश्चात् गोरखपुर विश्वविद्यालय, आगरा विश्वविद्यालय, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय, काशी विद्यापीठ और फिर सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय में प्राध्यापक, आचार्य, निदेशक, अतिथि आचार्य और कुलपति के पदों को सुशोभित किया। कैलिफोर्निया और वाशिंगटन विश्वविद्यालयों में अतिथि प्रोफेसर एवं ‘नवभारत टाइम्स’ के प्रधान सम्पादक भी रहे। अपनी साहित्यिक सेवाओं के लिए आप भारतीय ज्ञानपीठ के ‘मूर्तिदेवी पुरस्कार’, के.के. बिड़ला फाउंडेशन के ‘शंकर सम्मान’, उत्तर प्रदेश संस्कृत

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