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Katha Vivechna Aur Gadya Shilp
₹350.00 ₹263.00



₹350.00 ₹263.00
₹350.00 ₹263.00
Author: Ramvilas Sharma
Pages: 168
Year: 2012
Binding: Hardbound
ISBN: 9789350720370
Language: Hindi
Publisher: Vani Prakashan
कथा विवेचना और गद्यशिल्प
‘कथा विवेचना और गद्यशिल्प’ नाम के इस संकलन में कुछ निबन्ध कथाकारों पर हैं, कुछ विवेचकों पर तथा शेष ऐसे गद्यशिल्प पर जिसे कथा या विवेचना की परिधि में नहीं रखा जा सकता। चाहे कलात्मक गद्य हो चाहे विवेचनात्मक, अच्छा गद्य लिखना आसान काम नहीं है। गद्य की आलोचना लिखना और भी कठिन है। मैं इस कठिन कार्य से बचता रहा हूँ। प्रयोग रूप में कुछ छोटे-बड़े निबन्ध यहाँ प्रस्तुत हैं। ये सब लगभग चालीस साल की अवधि में लिखे गये हैं, अधिकांश पुराने निबन्ध संग्रहों में छपे हैं पर वे संग्रह अब अप्राप्य हैं। कुछ ऐसे भी हैं जो यहाँ पहली बार संकलित हैं।
मेरी पुस्तकों के कुछ नये पाठक ऐसे हैं जो बात ही नहीं, बात की जड़ तक पहुँचना चाहते हैं। मुझे आशा है कि इस तरह के संकलन उनके लिए विशेष रोचक होंगे। क्या पाठक और क्या लेखक हिन्दी गद्य के विकास में दोनों के योगदान की बड़ी गुंजाइश है। विवेचनात्मक गद्य कलापूर्ण हो और कलात्मक गद्य विवेकपूर्ण हो, यह सम्भव है। ऐसे गद्य के विकास में लेखकों और पाठकों के योगदान के लिए उनका परस्पर सहयोग अपेक्षित है।
– पुस्तक की भूमिका
| Binding | Hardbound |
|---|---|
| Authors | |
| ISBN | |
| Language | Hindi |
| Pages | |
| Publishing Year | 2012 |
| Pulisher |
रामविलास शर्मा
जन्म : 10 अक्तूबर, 1912।
जन्म-स्थान : ग्राम : ऊँचगाँव सानी, जिला उन्नाव (उत्तर प्रदेश)।
शिक्षा : 1932 में बी.ए., 1934 में एम.ए. (अंग्रेजी), 1938 में पी-एच.डी. (लखनऊ विश्वविद्यालय)।
देहावसान : 30 मई 2000।
लखनऊ विश्वविद्यालय के अंग्रेजी विभाग में पाँच वर्ष तक अध्यापन-कार्य किया, सन् 1943 से 1971 तक आगरा के बलवंत राजपूत कॉलेज में अंग्रेजी विभाग के अध्यक्ष रहे। बाद में आगरा विश्वविद्यालय के कुलपति के अनुरोध पर के.एम. हिंदी संस्थान के निदेशक का कार्यभार स्वीकार किया और 1974 में अवकाश लिया। सन् 1949 से 1953 तक रामविलासजी अखिल भारतीय प्रगतिशील लेखक संघ के महामंत्री रहे।

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