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Description
Lakkarbaggha Hans Raha Hai
Additional information
| Authors | |
|---|---|
| Binding | Hardbound |
| ISBN | |
| Language | Hindi |
| Pages | |
| Publishing Year | 2018 |
| Pulisher |



₹225.00 ₹195.00
₹225.00 ₹195.00
Author: Chandrakant Devtale
Pages: 106
Year: 2018
Binding: Hardbound
ISBN: 9788170557302
Language: Hindi
Publisher: Vani Prakashan
Lakkarbaggha Hans Raha Hai
| Authors | |
|---|---|
| Binding | Hardbound |
| ISBN | |
| Language | Hindi |
| Pages | |
| Publishing Year | 2018 |
| Pulisher |
चन्द्रकांत देवताले
जन्म : 7 नवम्बर, 1936; जौलखेड़ा, जिला – बैतूल (मध्यप्रदेश) में। शिक्षा : एम.ए. पी-एच.डी.।
कविता-संग्रह : ‘पहचान’ सीरीज़ में प्रकाशित हड्डियों में छिपा ज्वर (1973); दीवारों पर खून से (1975); लकड़बग्घा हँस रहा है (1980); रोशनी के मैदान की तरफ़ (1982); भूखण्ड तप रहा है (1982); आग हर चीज़ में बताई गई थी (1987); पत्थर की बैंच (1996); इतनी पत्थर रोशनी (2002); उसके सपने (विष्णु खरे-चन्द्रकांत पाटील द्वारा संपादित संचयन, 1997); बदला बेहद महँगा सौदा (नवसाक्षरों के लिए साम्प्रदायिकता विरोधी कविताएँ, 1995); उजाड़ में संग्रहालय (2003)।

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