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Loktantra Ke Paharua
₹495.00 ₹372.00



₹495.00 ₹372.00
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Author: Vinay Kumar
Pages: 396
Year: 2024
Binding: Paperback
ISBN: 9789357754170
Language: Hindi
Publisher: Vani Prakashan
लोकतन्त्र के पहरुआ
मैंने जीवन पर्यन्त अपनी इच्छाओं को सीमित रखा। मैं मर्यादा को अपने लिए लक्ष्मण रेखा मानता हूँ। मुझसे इसका उल्लंघन सम्भव नहीं है और साधन के प्रति मेरा कोई आकर्षण नहीं रहा। जीवन में कई मौक़े आये, लेकिन मैंने उन्हें ठुकराया। मैंने जीवन को पवित्रता से जीया है, इसका मुझे सन्तोष है।
अब कुछ भी शेष नहीं है। उम्र और स्वास्थ्य भी एक सच है। अब तक जो कुछ मिला है, उससे पूर्णरूपेण सन्तुष्ट हूँ। आज मैं बहुत कुछ करने की स्थिति में नहीं हूँ। बावजूद इसके अपना सम्पूर्ण देने के लिए तैयार हूँ। हमारी पार्टी जनता दल (यूनाइटेड) ने मुझे बहुत कुछ दिया है। मैं भी और अधिक देना चाहता हूँ, लेकिन क्या करूँ ? जीवन के अन्तिम क्षण तक पार्टी और आम जन के लिए सेवा करूँगा।
– इसी पुस्तक से
| Authors | |
|---|---|
| Binding | Paperback |
| ISBN | |
| Language | Hindi |
| Pages | |
| Publishing Year | 2024 |
| Pulisher |
विनय कुमार
विनय कुमार का जन्म 9 जून, 1961 को बिहार के जहानाबाद ज़िले के कन्दौल गाँव में हुआ।
शिक्षा : पटना मेडिकल कॉलेज, पटना से एम.डी. (मनोचिकित्सा)।
प्रकाशित पुस्तकें : ग़ज़ल-संग्रह : ‘क़र्ज़े तहजीब एक दुनिया है’; कविता-संग्रह : ‘आम्रपाली और अन्य कविताएँ’, ‘मॉल में कबूतर’; मनोसामाजिक विमर्श : ‘एक मनोचिकित्सक के नोट्स’ और ‘मनोचिकित्सा संवाद’।
इंडियन साइकायट्रिक सोसाइटी के लिए मनोचिकित्सा-शिक्षा विषयक पाँच किताबों का सम्पादन/सह-सम्पादन।
मनोरोग से सम्बन्धित विषयों पर अख़बारों तथा पत्रिकाओं में विपुल लेखन एवं मानसिक स्वास्थ्य की हिन्दी पत्रिका ‘मनोवेद डाइजेस्ट’ का सम्पादन।

prabhash chandra kumar –
Very nice 👍