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Manavputra Isa : Jeewan Aur Darshan
₹125.00 ₹105.00



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₹125.00 ₹105.00
Author: Raghuvansh
Pages: 281
Year: 2008
Binding: Paperback
ISBN: 9788180312250
Language: Hindi
Publisher: Lokbharti Prakashan
मानवपुत्र ईसा : जीवन और दर्शन
विश्वविख्यात चरितावली में मानवपुत्र ईसा का नाम प्रथम पंक्ति में है। उनका जीवन एक स्तर पर जितना सुस्पष्ट और सुलिखित है, उतना ही उसके विविध पक्षों की व्याख्या को लेकर विद्वानों और विचारकों में मतभेद रहा है। वे ईश्वर के बेटे हैं पर मानवपुत्र कहे जाते हैं। इस रूप में लौकिक और अलौकिक संसार को वे बड़ी ख़ूबी से जोड़ते हैं। उनके सीधे-सादे जीवनवृत्त में सृष्टि के अनेक रहस्य अन्तर्निहित हैं। इस स्थिति में ईसा का जीवन आरम्भ से ही बड़े-बड़े जीवनीकारों, दार्शनिकों और कलाकारों के लिए सूक्ष्म जिज्ञासा का विषय रहा है। पश्चिमी संसार की कलाओं का एक बहुत बड़ा भाग ईसा के जीवन-चरित से प्रेरित और प्रभावित है। भारत के बड़े-बड़े मनीषी भी उनके व्यक्तित्व से सीखते हैं। महात्मा गांधी के लिए अत्यन्त प्रेरक प्रसंगों में से एक पर्वत-प्रवचन का रहा है।
ऐसे सरल पर उलझे हुए चरित को लिखना किसी भी लेखक के लिए योग्य चुनौती है। डॉ. रघुवंश ने केवल ईसा की कहानी नहीं कह दी है, वरन् अपनी भाषा में उसका पुनःसृजन किया है। वृत्त, चरित और जीवनी से आगे वह रचनात्मक साहित्य बनने के लिए प्रस्तुत है। इलाहाबाद कैथलिक सैमिनरी के कई विद्वानों ने उसे पढ़ा और देखा है। इस रूप में जहाँ एक ओर उसका साहित्यिक पक्ष विकसित है, वहीं उसका वृत्ताधार प्रामाणिक और परीक्षित, और इन दोनों स्तरों पर वह आकर्षक पाठ्य-सामग्री सिद्ध होगी।
| Authors | |
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| Binding | Paperback |
| ISBN | |
| Language | Hindi |
| Pages | |
| Publishing Year | 2008 |
| Pulisher |
रघुवंश
सुप्रसिद्ध सामाजिक-राजनीतिक चिन्तक प्रो. रघुवंश का जन्म 30 जून, 1921 को उत्तर प्रदेश के जिला हरदोई के गोपामऊ क़स्बे में श्रीराम सहाय के परिवार में हुआ। इलाहाबाद विश्वविद्यालय से हिन्दी भाषा में एम.ए., डी.फ़िल. की उपाधि प्राप्त करने के बाद इसी विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग में ही प्रवक्ता, रीडर, प्रोफ़ेसर (अध्यक्ष) रहकर हिन्दी भाषा, साहित्य के अध्ययन-अध्यापन में संलग्न रहे। सन् 1981 में सेवानिवृत्ति के उपरान्त विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की शोध-परियोजना के अन्तर्गत शिमला के उच्च अध्ययन संस्थान में ‘मानव संस्कृति का रचनात्मक आयाम’ विषय पर शोध-कार्य किया।

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