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Description
मई आत्महत्याओं का मौसम नहीं : गद्य व गद्य कविताएँ
मेरी माँ की रोटियाँ गोल नहीं होती थीं, पर उनकी थकान का व्याकरण और पानी का तीन मिरे बहुत काम आया।
कवि प्रेम को ताप की तरह सहते हैं और अनिद्रा के गर्भ में बो देते हैं अपने शब्द।
कविता की प्रतीक्षा भी कवि के शब्दकोश को समृद्ध करती है।
— अनुराधा सिंह
अनुराधा सिंह को पढ़ने के बाद मैं कह सकता हूँ कि वह अपने पहले संग्रह से ही आज की समूची महिला-पुरुष-हिंदी कविता में अपनी जगह बना चुकी हैं। उनकी रचनाएँ इतनी ऊँची हैं कि यकबारगी विश्वास नहीं होता कि वाकई ऐसी कविताएँ लिखी जा रही हैं और आप उन्हें पढ़ रहे हैं। उनकी खूबियों पर एक लम्बी समीक्षा अनिवार्य हो चुकी है। हिंदी में उन जैसी स्त्री-पुरुष प्रतिभाओं की नूतन उपस्थिति से कम-से-कम मुझे अत्यधिक हर्ष और फ़ख्र होता है, कविता में निरंतर नई ज़िंदगी, उम्मीद और प्रेरणा आती रहती है।
— विष्णु खरे (समालोचन वेब पत्रिका पर)
Additional information
| ISBN | |
|---|---|
| Authors | |
| Binding | Paperback |
| Language | Hindi |
| Pages | |
| Publishing Year | 2026 |
| Pulisher |











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