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मेघदूत : एक पुरानी कहानी
महाकवि कालिदास कृत मेघदूत के अनुवादों और टीकाओं की हिन्दी में कमी नहीं, पर यह पुस्तक न तो उसका अनुवाद मात्र है और न महज़ टीका। आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी हिन्दी के ऐसे वाङ्मय-पुरुष हैं जिन्होंने न केवल समूचे मध्यकालीन साहित्येतिहास को अपनी शोधालोचना का विषय बनाया, बल्कि संस्कृत, प्राकृत और अपभ्रंश साहित्य की कुछ कालजयी कृतियों का पुनः सृजन भी किया।
मेघदूत : एक पुरानी कहानी महाकवि कालिदास की अमर काव्य-कृति का ऐसा ही पुनः सृजन है। द्विवेदीजी ने इसमें मेघदूत के कथा-प्रसंगों की व्याख्या के बहाने उन अछूते सन्दर्भों का भी उद्घाटन किया है जो इसकी रचना-प्रक्रिया के दौरान कालिदास के मन में रहे होंगे। तत्कालीन राजनीतिक-सामाजिक वातावरण, जनसमाज की आर्थिक स्थिति, विद्वज्जनों के वैचारिक अन्तर्विरोध और मन-प्राण को आह्लादित कर देनेवाली वे रससिक्त उद्भावनाएँ जो रसज्ञ पाठक को कल्पनातीत स्पर्शानुभूति तक ले जा सकेंसभी कुछ इसमें छविमान है।
लगता है, वह सब अनकहा जिसे कालिदास कहना चाहते थे, यहाँ स्पष्टतः कह दिया गया है। आचार्य द्विवेदी की प्रकाण्ड मेधा, विनोदवृत्ति और विलक्षण सृजनात्मक क्षमता से स्पृश्य मेघदूत की यह कहानी निस्सन्देह एक अविस्मरणीय कृति है।
Additional information
| Authors | |
|---|---|
| Binding | Paperback |
| ISBN | |
| Pages | |
| Publishing Year | 2023 |
| Pulisher | |
| Language | Hindi |











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