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मेघवाहन
कलिंग के महापराक्रमी सम्राट मेघवाहन खारवेल के जीवन पर केन्द्रित एक सशक्त ऐतिहासिक उपन्यास। बाहरी शक्तियों के अन्धड़ ने खारवेल को भारत का सजग प्रहरी और यहाँ की सांस्कृतिक एकता का स्वप्न साकार करने वाला बना दिया है।
मेघवाहन कलिंग की पुरानी पराजय का बदला लेने के लिए मगधराज शुंग पर आक्रमण करने को आकुल था, लेकिन तब तक यूनान का बादशाह डिमेस्ट्रियस भी मगध पर आक्रमण करने के लिए घेरा डाल चुका था। मेघवाहन चाहता तो डिमेस्ट्रियस से मिलकर शुंग पर आक्रमण कर सकता था लेकिन उसने यह उचित नहीं समझा। देश के किसी भी हिस्से पर किया गया आक्रमण वह स्वयं पर आक्रमण मानता था। भारत की एकता का प्रश्न ही उसके लिए सर्वोपरि था।
परिणामस्वरूप उसने सर्वप्रथम डिमेस्ट्रियस पर आक्रमण कर उसे सीमा के बाहर खदेड़ दिया। इसी वीरोचित कर्म से वह इतिहास से ऊपर उठकर जनश्रुति का नायक बन गया। उपन्यास की विशेषता है इसमें प्रस्तुत गहन दार्शनिक चिन्तन, जो कथा–प्रवाह में ऐसे घुल गया है जैसे फूल में सुगन्ध। पाठक को लगेगा कि किस तरह उस समय भारत का सामान्य जन भी संस्कृति और दर्शन की जीवनधारा से गहरे तक जुड़ा हुआ था। ओजस्वी शैली में लिखे गये इस कथानक में सत्यनिष्ठा और विरल सौन्दर्यबोध भी उपन्यास को विशेष महत्त्व प्रदान करते हैं। इस उपन्यास के पात्रों में पाठकों को एक ओर अपने जीवन के बिम्ब मिलेंगे, उनकी समस्याओं में अपनी समस्या और अपने प्रश्नों के उत्तर भी मिलेंगे तो दूसरी ओर उनके साहस और विश्वास में सत्य–शिव–सुन्दर का सामंजस्य उद्भासित होगा।
Additional information
| Authors | |
|---|---|
| Binding | Hardbound |
| ISBN | |
| Language | Hindi |
| Pages | |
| Publishing Year | 2025 |
| Pulisher |











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