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Mohan Rakesh Ki Diary
₹585.00 ₹425.00



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Author: Mohan Rakesh
Pages: 386
Year: 2023
Binding: Paperback
ISBN: 9788170285618
Language: Hindi
Publisher: Rajpal and Sons
मोहन राकेश की डायरी
मोहन राकेश की ज़िंदगी एक खुली किताब रही है। उसने जो कुछ लिखा और किया – वह दुनिया को मालूम है। लेकिन उसने को कुछ जिया – यह सिर्फ उसे मालूम था। अपनी सांसों की कहानी उसने डायरियों में दर्ज की है। और कितना तकलीफ़देह है यह एहसास कि राकेश जैसा लेखक अपने अनुभवों की कहानियां दुनिया के लिए लिख जाए और अपने व्यक्तिगत संताप, सुख और दुःख के क्षणों को जानने और पहचानने के लिए अपने दस्तावेज़ दोस्तों के पास छोड़ जाए… डायरियाँ, लेखक का अपना और अपने हाथ से किया हुआ पोस्ट-मार्टम होती हैं। एक लेखक कैसे तिल-तिल जीता और मरता है-अपने समय को सार्थक बनाते हुए खुद को कितना निरर्थक पाता है और अपनी निरर्थकता में से कैसे वह अर्थ पैदा करता है – इसी रचनात्मक आत्म-संघर्ष को डायरियाँ उजागर करती हैं। राकेश की डायरी इसी आत्म-संघर्ष के सघन एकांतिक क्षणों का लेखा-जोखा है, जो वह किसी के साथ बांट नहीं पाया….
– इस पुस्तक में कमलेश्वर द्वारा लिखी भूमिका से
| Authors | |
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| Binding | Paperback |
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| Language | Hindi |
| Pages | |
| Publishing Year | 2023 |
| Pulisher |
मोहन राकेश
जन्म : 8 जनवरी, 1925 अमृतसर (पंजाब)।
निधन : 3 दिसंबर, 1972 को नई दिल्ली में।
शिक्षा : पंजाब विश्वविद्यालय से हिंदी और अंग्रेजी में एम.ए.।
हिंदी के बहुमुखी प्रतिभा-संपन्न नाट्यलेखक और उपन्यासकार। जीवकोपार्जन के लिए विभिन्न स्कूल कॉलेजों में हिंदी-अध्यापन। उल्लेखनीय हैं – एलफिंस्टन कॉलेज, बंबई; डी.ए.वी. कॉलेज, जालंधर (हिंदी विभागाध्यक्ष); शिमला बिशप काटेन स्कूल, शिमला तथा दिल्ली विश्वविद्यालय में सायंकालीन कक्षाएँ। कुछ वर्षों तक ‘सारिका’ के संपादक। नाट्यकार के नाते संगीत नाटक अकादमी से पुरस्कृत-सम्मानित।

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