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Mohan Rakesh Rachanawali : Vols. 1-13
₹10,400.00 ₹8,000.00



₹10,400.00 ₹8,000.00
₹10,400.00 ₹8,000.00
Author: Mohan Rakesh
Pages: 3000
Year: 2011
Binding: Hardbound
ISBN: 9788183614276
Language: Hindi
Publisher: Radhakrishna Prakashan
मोहन राकेश रचनावली : भाग – 1-13
मोहन राकेश हिन्दी के सर्वाधिक ‘एक्सपोज़्ड’ रचनाकार माने जाते हैं। राकेश का जीवन और लेखन ‘घर’ नामक मृगमरीचिका के पीछे बेतहाशा भागते एक बेसब्र, बेचैन, व्याकुल और ज़िद्दी तलाश का पर्याय है।
रचनावली का यह पहला खंड—‘अन्तरंग’—उनके इसी ‘अपना आप’ पर केन्द्रित है। यह खंड लेखक के पेचीदा जीवन के बहिरंगी बहुरूपों को दिखाने के साथ–साथ अन्तरंग के गुह्य प्रदेशों के विचित्र रहस्य–लोक के गवाक्ष भी खोलता है। इसका पहला अंश अधूरा ‘आत्मकथ्य’ है। इसके बाद ‘चींटियों की पंक्तियाँ : ज़मीन से काग़ज़ों तक’, ‘देखो बच्चू!’ और मृत्यु से लगभग दो महीने पहले रजिन्दर पॉल द्वारा लिया गया एक ऐसा साक्षात्कार है, जो उनके उदास, असुरक्षित, अस्थिर एवं अकेले आरम्भिक जीवन की प्रामाणिक और दिलचस्प झाँकी प्रस्तुत करता है।
इस खंड के अन्त में 1950 से 1958 तक उनके द्वारा लिखी गई डायरी को रखा गया है। राकेश के अन्तर्विरोधी जटिल चरित्र एवं उनके साहित्य को सही परिदृश्य और उचित सन्दर्भ में समझने के लिए यह खंड महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
| Authors | |
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| Binding | Hardbound |
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| Language | Hindi |
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| Publishing Year | 2011 |
| Pulisher |
मोहन राकेश
जन्म : 8 जनवरी, 1925 अमृतसर (पंजाब)।
निधन : 3 दिसंबर, 1972 को नई दिल्ली में।
शिक्षा : पंजाब विश्वविद्यालय से हिंदी और अंग्रेजी में एम.ए.।
हिंदी के बहुमुखी प्रतिभा-संपन्न नाट्यलेखक और उपन्यासकार। जीवकोपार्जन के लिए विभिन्न स्कूल कॉलेजों में हिंदी-अध्यापन। उल्लेखनीय हैं – एलफिंस्टन कॉलेज, बंबई; डी.ए.वी. कॉलेज, जालंधर (हिंदी विभागाध्यक्ष); शिमला बिशप काटेन स्कूल, शिमला तथा दिल्ली विश्वविद्यालय में सायंकालीन कक्षाएँ। कुछ वर्षों तक ‘सारिका’ के संपादक। नाट्यकार के नाते संगीत नाटक अकादमी से पुरस्कृत-सम्मानित।

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