Paltaniya

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Author: Chandrakishore Jaiswal

Availability: 5 in stock

Pages: 640

Year: 2026

Binding: Paperback

ISBN: 9789347265778

Language: Hindi

Publisher: Radhakrishna Prakashan

Description

पलटनिया

स्वतंत्र भारत में नैतिक और सामाजिक मूल्यों का क्षरण चन्द्रकिशोर जायसवाल के कथाकार मन को अत्यन्त व्यथित करता है। अपने उपन्यासों में उन्होंने अलग-अलग कोणों से पतन की इस आँधी को चिह्नित किया है, उसके घटक तत्त्वों पर उँगली भी रखी है और ऐसे पात्रों का सृजन भी किया है जो चारित्रिक विनाश की इस धारा को रोकना चाहते हैं; वापस मोड़ना चाहते हैं।

पलटनिया खा-खाकर कुछ से कुछ हो जाने वाले लोगों को कठघरे में खड़ा करनेवाले इस उपन्यास ‘पलटनिया’ में उन्होंने बिहार के कोसी अंचल की गरीबी, रोजी-रोटी के लिए मजदूरों के पलायन और बीसवीं सदी के नौवें दशक में परवान चढ़े अपहरण उद्योग जैसे अनेक दृश्य-अदृश्य मसलों पर अपना ध्यान केन्द्रित किया है।

बहुकेन्द्रीय कथा-वितान में रचा गया यह उपन्यास अत्यन्त सूक्ष्म ब्योरों के साथ ग्रामीण समाज में ऊँची जातियों की दबंगई और आर्थिक-सामजिक रूप से पिछड़े-कुचले तबकों की कहानी कहता है और उन तमाम विडम्बनाओं पर उँगली रखता है जो ताकत के लिए व्याकुल मौजूदा समाज की विशेषताएँ बन चुकी हैं। वह समाज जो खुलकर कहता है कि ‘रोटी खाई चक्कर से, दुनिया चले मक्कर से।’

यह उपन्यास इतिहास लिखने की कथा भी है। कहानी के आरम्भ में ही कथाकार कहता है, “हत्यारों के आगे तो इतिहास हमेशा से सिर झुकाता आया है।” आज जो कुछ नहीं है वह कैसे अपनी चालाकियों से सब कुछ बन जाता है और इतिहास में दाखिल होने की माँग करने लगता है, यह उपन्यास इस प्रक्रिया की बहुत बारीकी से पड़ताल करता है। एक समूचे अंचल के जीवन की वास्तविक तसवीर खींचने वाला संग्रहणीय उपन्यास।

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Paperback

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Language

Hindi

Pages

Publishing Year

2026

Pulisher

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