

Patjhar Ke Rang

Patjhar Ke Rang
₹250.00 ₹188.00
₹250.00 ₹188.00
Author: Shobha Narayan
Pages: 168
Year: 2025
Binding: Paperback
ISBN: 9789362018656
Language: Hindi
Publisher: Setu Prakashan
- Description
- Additional information
- Reviews (0)
Description
पतझर के रंग
‘पतझर के रंग’ एक वयस्क प्रेम कहानी है जिसमें है पहले प्रेम जैसी अनिश्चितता और दुविधा, उसकी अपेक्षाएँ, उसकी चिन्ता, उसका उतावलापन। एक अजीब सा भय। प्रेम क्या हमेशा के लिए है… मन कहता है हाँ, पर दिमाग कहता है कहाँ होता है ऐसा। जाति-पाँति से ऊपर है प्रेम…न रंग देखता, न धर्म, न उम्र। बस हो जाता है… कब कहाँ कैसे… यह तो प्रेम ही जाने… उपन्यास के मुख्य पात्र हैं सुधा और विली। विली जर्मन मूल का अमेरिकी नागरिक है और सुधा है भारतीय मूल की एक अमेरिकी। उपन्यास की पृष्ठभूमि अमेरिका है। अमेरिका में पतझर के दिनों में बहुत से पेड़ों की पत्तियों के रंग बहुत ही मनभावन रंगों में बदल जाते हैं जमीन पर बिखरने और मिट्टी में आत्मसात् होने से पहले। जैसे वसन्त में हजारों फूलों की छटा दर्शनीय होती है वैसे ही इन पेड़ों का सौन्दर्य भी कम नहीं। पतझर एक रूपक के रूप में है। जीवन के पतझर में भी वसन्त के स्वप्न हो सकते हैं। अपने जीवन के उस पड़ाव पर हैं सुधा और विली, जब जिन्दगी ठहर सी जाती है… अब आगे क्या…और समय एक ऐसे बिन्दु पर ठिठका लगता है जहाँ हर दिन पहले से अलग नहीं होता… यह पीछे मुड़कर देखने का समय भी है… क्या खोया, क्या पाया, जानने का… कुछ के लिए यह नयी तलाश का समय है, कुछ के लिए अपने अन्दर झाँकने का, स्वयं से साक्षात्कार का भी। सुधा और विली ने एक-दूसरे के माध्यम से यह जाना, सम्मिलित खोज थी उनकी। सम्भवतः अपनी-अपनी जिन्दगी में प्रेम के उस कोमल भाव से वे दोनों अपरिचित रहे जो समर्पण की भावना से प्रेरित होता है। दैहिक प्रेम उनके लिए अवांछित नहीं है, उसके साथ जुड़ी है निबाहने की जिम्मेदारी, एक-दूसरे के सुख-दुख में पूरी निष्ठा से साथ देने की पहल और साथ होते हुए भी एक- दूसरे की जरूरत का एहसास और उसका आदर। उपन्यास की पृष्ठभूमि अमेरिका है। किसी भी नये देश में अपने देश को छोड़कर बसने की अपनी अलग समस्याएँ हैं विशेषकर पहली पीढ़ी के लिए जो अपनी जीवनशैली ही नहीं, साथ लाती है यादें, गली-मोहल्ला, रिश्ते-नाते, संगी-साथियों से बिछड़ने की टीस। ऐसी मनःस्थिति में यदि कोई समझने वाला साथी न हो तो अकेलापन काटने दौड़ता है… सुधा न केवल इस नये परिवेश में स्वयं को स्थापित करने की कशमकश से गुजर रही थी बल्कि हरि से अपने विवाह सम्बन्ध में एक प्रेमी, एक सहारा, एक साथ तलाश रही थी। यह केवल प्रेम कथा नहीं है… इसमें भारतीय और पाश्चात्य जीवनशैली की तुलना भी है… पूर्व और पश्चिम की जीवनदृष्टि एक-दूसरे से बहुत भिन्न है। अमेरिका में जन्मी नयी भारतीय अमेरिकी पीढ़ी के नये मूल्य, उनकी अलग सोच की भी पड़ताल करता है यह उपन्यास। शैली और भावना के स्तर पर जैसा लेखिका स्वयं कहती हैं इस उपन्यास को लम्बी कविता भी कहा जा सकता है।
Additional information
| Authors | |
|---|---|
| ISBN | |
| Binding | Paperback |
| Language | Hindi |
| Pages | |
| Publishing Year | 2025 |
| Pulisher |









Reviews
There are no reviews yet.