

Piraud

Piraud
₹225.00 ₹170.00
₹225.00 ₹170.00
Author: Udayan Vajpayee
Pages: 152
Year: 2025
Binding: Paperback
ISBN: 9789362011732
Language: Hindi
Publisher: Setu Prakashan
- Description
- Additional information
- Reviews (0)
Description
पिराउद
‘पिराउद’ उदयन वाजपेयी का अनोखा संग्रह है। इसमें सात कहानियाँ और दो संस्मरण हैं। एक ही जिल्द में कहानियाँ और संस्मरण साथ प्रकाशित करना दो लगभग विपरीत या कम से कम अलग विधाओं को साथ रखने जैसा है। कहानियों के केन्द्र में कल्पना होती है, संस्मरणों के केन्द्र में स्मृति। कहानियाँ कल्पना का आश्रय लेती हैं, संस्मरण स्मृति का। दोनों ही विधाओं में अपनी-अपनी तरह से सत्य को छूने की आकांक्षा का वास होता है।
कहानी में कल्पना वह चुम्बकीय क्षेत्र है जिसकी ओर अनेक स्मृतियाँ खिंची चली आती हैं और इस’ आने’ में ये स्मृतियाँ अपना स्वरूप इस तरह बदल लेती हैं कि उन्हें कल्पना अपने अनुसार बिल्कुल नये रूप में बुन देती है या उन्हें विन्यस्त कर देती है। इस तरह कहानी में कल्पना के चुम्बकीय क्षेत्र के कारण लेखक या/और समाज की स्मृतियाँ अपना पुराना चोला छोड़कर न सिर्फ़ नया शरीर धारण कर लेती हैं बल्कि वे एक-दूसरे के साथ भी एक बिल्कुल ही नये बल्कि अप्रत्याशित विन्यास में आ खड़ी होती हैं। अब वे महज स्मृति न रह जाकर कल्पना के शहर की नागरिकता प्राप्त कर लेती हैं। इस तरह देखने पर हम शायद यह कह सकते हैं कि कहानी कल्पना के नगर में स्मृतियों के भटकाव की विधा है। शायद इसीलिए कहानी हमेशा ही वर्तमान में घटित है। उनके इसी भटकाव के फलस्वरूप कहानी में रस-निष्पत्ति होती है, उसमें किसी कोंपल की तरह अन्तर्दृष्टि फूटती है।
संस्मरण-लेखन की विशिष्टता इस बात में है कि उसमें स्मृतियों को इस तरह विन्यस्त किया जाता है कि उन्हें पढ़ते समय हमें यह महसूस हो कि यहाँ वर्णित सारी घटनाएँ भले ही अतीत में घटित हुई हों पर वे महज बीते हुए समय का दस्तावेज नहीं हैं। उनमें ऐसा कुछ जरूर है जो अतीत होते हुए भी व्यतीत नहीं हुआ है। संस्मरण इन बीते हुए पलों के उन हिस्सों को प्रकाश में लाता है जो बीतकर भी नहीं बीतते, जो गुज्जरकर भी हमारे सामने धड़कते रहते हैं।
Additional information
| ISBN | |
|---|---|
| Authors | |
| Binding | Paperback |
| Language | Hindi |
| Pages | |
| Publishing Year | 2025 |
| Pulisher |









Reviews
There are no reviews yet.