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Description
प्रसाद निराला अज्ञेय
1989 प्रसाद की जन्मशतवार्षिकी का आरम्भ था. 1996 निराला का है। यह अवसर उचित और प्रासंगिक है कि हम इन कवियों के मूल्यांकन और परिप्रेक्ष्य में नए सिरे से रुचि लें, और उनकी रचना के जो पक्ष कहीं अब तक अनदेखे रह गये हैं उन्हें फिर से सृजित करें। साथ-ही-साथ यह अपेक्षित हो जाता है कि यत्न यह समझने का भी हो कि प्रसाद- निराला काव्य के बाद हिन्दी कविता का प्रवाह किन-किन दिशाओं में, कैसे गतिशील हुआ ! एक से अधिक अर्थों में यह कहा जा सकता है कि प्रसाद-निराला काव्य के विकास का अध्ययन एक स्तर पर समूचे आधुनिक हिन्दी काव्य के विकास को समझने का यत्न है। यों, प्रसाद-निराला-अज्ञेय : इन तीन शीर्ष कवियों के माध्यम से समूची आधुनिक हिन्दी कविता का सृजनशील रूप हमारे सामने उजागर हो उठता है, और बड़ी बात यह है कि इस आलोचना के द्वारा पाठक अपने आपको इस समृद्ध काव्य-प्रक्रिया का अंग बना पाता है। काव्यालोचन का इससे अधिक स्पृहणीय रूप और क्या सम्भव है, विशेष रूप से प्रसाद निराला जन्मशतवार्षिकी जैसे अवसरों पर !
Additional information
| Authors | |
|---|---|
| Binding | Text |
| ISBN | |
| Language | Hindi |
| Pages | |
| Publishing Year | 2019 |
| Pulisher |
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